ऋतव्रत खेमे में शामिल हुए अनुब्रत मंडल, तृणमूल के बागी गुट ने समानांतर संगठन बनाया

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ऋतव्रत खेमे में शामिल हुए अनुब्रत मंडल, तृणमूल के बागी गुट ने समानांतर संगठन बनाया

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  • Publish Date - July 11, 2026 / 08:40 PM IST,
    Updated On - July 11, 2026 / 08:40 PM IST

कोलकाता, 11 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने पार्टी पर कब्जा करने की अपनी कोशिशों में तेजी लाते हुए शनिवार को समानांतर राज्य और जिला समितियां गठित कीं तथा ममता बनर्जी के कई पुराने वफादार नेताओं को अपने साथ मिला लिया।

ऋतव्रत गुट में शामिल हुए ममता के वफादार रहे इन नेताओं में बीरभूम के कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल भी शामिल हैं।

ऋतव्रत गुट के इस कदम को राजनीतिक बगावत से आगे बढ़कर संगठन खड़ा करने की दिशा में बढ़ने के तौर पर देखा जा रहा है।

यहां ऋतव्रत गुट की दो दिन की कार्यकारी समिति की बैठक के बाद की गई इन नियुक्तियों से पता चलता है कि बागी नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती देने से आगे बढ़कर पार्टी का एक समानांतर ढांचा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि निर्वाचन आयोग के पास तृणमूल पर उनके दावे का मामला अभी भी लंबित है।

यह कदम बागी गुट की रणनीति का दूसरा बड़ा कदम है। इससे पहले, पिछले महीने हुए एक खास बैठक में, इस गुट ने ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष के पद से हटा दिया था, वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को इस पद के लिए चुना था। इसके अलावा, एक समानांतर कार्यकारी समिति बनाई थी और निर्वाचन आयोग से ‘‘असली’’ तृणमूल कांग्रेस के तौर पर मान्यता मांगी थी।

इसबीच, सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश बीरभूम से आया है।

बीरभूम के कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल, जिन्हें लंबे समय तक ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद राजनीतिक सहयोगियों में से एक माना जाता था, उन्हें बागी गुट की बीरभूम इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी में आई दरार के बाद उनका पाला बदलना प्रतीकात्मक रूप से सबसे अहम घटनाओं में से एक है।

मंडल से जुड़े घटनाक्रम से यह प्रदर्शित होता है कि तृणमूल के अंदर राजनीतिक समीकरण कितनी तेजी से बदले हैं। इसके साथ ही, वह काजल शेख वाले खेमे में भी आ गए हैं। शेख बीरभूम के एक और प्रभावशाली नेता हैं, जिनके साथ जिले में वर्चस्व के लिए मंडल की लंबी लड़ाई चली थी, जबकि पार्टी नेतृत्व ने कई बार उनके बीच सुलह कराने की कोशिश की थी।

वहीं, राज्यसभा के पूर्व सदस्य शांतनु सेन को ऋतव्रत गुट के मुख्य प्रवक्ताओं में से एक नियुक्त किया गया, जबकि विधायक अरुणव (राजा) सेन को हावड़ा ज़िला इकाई का अध्यक्ष बनाया गया। पूर्व मंत्री रवींद्रनाथ चटर्जी को पूर्वी बर्धमान की जिम्मेदारी सौंपी गई और देबाशीष कुमार को दक्षिण कोलकाता जिला इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

इस गुट ने पश्चिमी मेदिनीपुर, पश्चिमी बर्धमान, बांकुड़ा, पुरुलिया, डायमंड हार्बर, सुंदरबन, उत्तरी कोलकाता और कई अन्य संगठनात्मक जिलों के लिए जिला अध्यक्षों की भी घोषणा की। इससे राज्यव्यापी विस्तार का इसका पहला चरण पूरा हो गया।

ये घटनाक्रम ऐसे समय में हुए हैं जब बागी गुट 1998 में पार्टी का गठन होने के बाद, 21 जुलाई को स्थापना दिवस अलग से मनाने की तैयारी कर रहा है। इससे पता चलता है कि यह विवाद अब तृणमूल की राजनीतिक पहचान और विरासत की लड़ाई में बदल गया है।

ऋतव्रत बनर्जी ने कहा कि उन्हें मेयो रोड पर गांधी प्रतिमा के सामने 21 जुलाई को शहीद दिवस रैली आयोजित करने की अनुमति मिल गई है।

भाषा सुभाष माधव

माधव

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