भारत-चीन सीमा पर सेना की पहल, गुंजी में बंद प्राथमिक विद्यालय का पुनर्निर्माण

भारत-चीन सीमा पर सेना की पहल, गुंजी में बंद प्राथमिक विद्यालय का पुनर्निर्माण

भारत-चीन सीमा पर सेना की पहल, गुंजी में बंद प्राथमिक विद्यालय का पुनर्निर्माण
Modified Date: May 25, 2026 / 07:35 pm IST
Published Date: May 25, 2026 7:35 pm IST

पिथौरागढ़, 25 मई (भाषा) उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों से संबंध मजबूत करने के उद्देश्य से सेना ने भारत-चीन सीमा पर गुंजी क्षेत्र में वर्षों से बंद पड़े एक प्राथमिक विद्यालय का पुनर्निर्माण किया है।

इसके अलावा, उच्च हिमालयी घाटियों—व्यांस, दारमा और चौदांस में मूल रूप से रहने वाले रंग समुदाय के उपयोग के लिए धारचूला में एक सांस्कृतिक केंद्र भी बनाया गया है। ये सभी पहलें ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के तहत की गई हैं।

गुंजी की ग्राम प्रधान और भारतीय पुलिस सेवा की पूर्व अधिकारी विमला गुंज्याल ने बताया कि आसपास के गांवों से पलायन के कारण छात्रों की कमी होने पर वर्ष 1995 में गुंजी का प्राथमिक विद्यालय बंद हो गया था।

उन्होंने बताया कि अब सेना ने इसका पुनर्निर्माण कर दिया है और नए भवन में आठ बच्चों ने दाखिला ले लिया है। इन छात्रों को फिलहाल सेना के जवान ही शिक्षा दे रहे हैं।

सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी गुंज्याल के अनुसार, भारतीय सेना ने इस स्कूल के पुनर्निर्माण पर लगभग 72 लाख रुपये खर्च किए हैं।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में आदि कैलाश तीर्थयात्रा के कारण क्षेत्र में आजीविका के अवसर बढ़े हैं, जिससे कुछ ग्रामीण सीमांत क्षेत्रों में पुनः बसने लगे हैं। इसके चलते राज्य शिक्षा विभाग की मंजूरी मिलने पर स्कूल के नियमित रूप से संचालित होने की संभावना है।

सेना ने धारचूला में रंग समुदाय के लिए ‘रंग बंग मुंग केंद्र’ नामक एक सांस्कृतिक भवन भी बनाया है, जिसका उपयोग समुदाय अपने त्योहारों और सामाजिक गतिविधियों के लिए कर सकेगा।

रंग समुदाय की सदस्य शालू दताल ने बताया कि इस सांस्कृतिक केंद्र का उद्घाटन हाल ही में भारतीय सेना की मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) अनिंद्य सेनगुप्ता ने किया।

उन्होंने बताया कि इन प्रमुख निर्माण कार्यों के अलावा सेना ने रंग सांस्कृतिक संग्रहालय के पास एक पुराने पुस्तकालय भवन का जीर्णोद्धार, दारमा घाटी के गू गांव में एक सामुदायिक भवन का निर्माण, जिप्ती गांव में दो शौचालयों का निर्माण तथा कुटी गांव में एक पुस्तकालय की स्थापना भी की है।

भाषा

सं, दीप्ति रवि कांत


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