छत्तीसगढ़ के करीब 50 कलाकारों ने स्वतंत्रता दिवस के ‘एट होम’ कार्यक्रम की निमंत्रण किट तैयार कीं
छत्तीसगढ़ के करीब 50 कलाकारों ने स्वतंत्रता दिवस के ‘एट होम’ कार्यक्रम की निमंत्रण किट तैयार कीं
(अश्विनी श्रीवास्तव)
नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) स्वतंत्रता दिवस के ‘एट होम’ कार्यक्रम के लिए इस वर्ष हस्तनिर्मित निमंत्रण किट तैयार करने वाले 130 शिल्पकारों की टीम में कभी नक्सल प्रभावित रहे छत्तीसगढ़ के करीब 50 कलाकार शामिल हैं।
इस कार्यक्रम की मेजबानी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा की जाएगी।
इस निमंत्रण किट में छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की समृद्ध शिल्पकला, परंपराओं व सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया है।
राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों और अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) की एक टीम ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप इसकी परिकल्पना की है।
यह किट स्थिरता, समावेशिता और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
एनआईडी के निदेशक अशोक मंडल ने बताया, ‘‘निमंत्रण किट करीब 130 लोगों ने तैयार की है, जिनमें छत्तीसगढ़ के कभी वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे बस्तर क्षेत्र के करीब 50 शिल्पकार शामिल हैं। यह समावेशी विकास और आजीविका के अवसरों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।’’
उन्होंने बताया कि तीन महीने से अधिक समय तक इन शिल्पकारों ने एनआईडी के शिक्षकों, डिजाइनर और विद्यार्थियों के साथ मिलकर अपनी पारंपरिक व पर्यावरण-अनुकूल शिल्प तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए भारत के राष्ट्रपति की ओर से भेजी जाने वाली इस अनूठी निमंत्रण किट को तैयार किया।
मंडल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘पूरी तरह हस्तनिर्मित और पर्यावरण-अनुकूल यह किट भारत की कलात्मक उत्कृष्टता, सतत प्रथाओं और पारंपरिक शिल्पकार समुदायों के सशक्तीकरण का प्रतीक है।’’
निमंत्रण किट में छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में पर्यावरण संरक्षण व सतत पर्यावरणीय तौर-तरीकों के प्रेरणादायक उदाहरणों को दर्शाया गया है।
ये क्षेत्र पहाड़ियों, घुमावदार नदी प्रवाह और भरपूर हरियाली वाले समृद्ध प्राकृतिक परिदृश्य के लिए जाने जाते हैं।
इन राज्यों की जीवंत लोक कला परंपराओं का इस्तेमाल करते हुए तैयार की गई यह निमंत्रण किट समुदायों, रचनात्मकता और संरक्षण के बीच गहरे परस्पर संबंध की झलक प्रस्तुत करती है।
मंडल ने बताया कि निमंत्रण किट में छत्तीसगढ़ की ढोकरा ढलाई कला को शामिल किया गया है, जो भारत की सबसे पुरानी धातु शिल्प की परंपराओं में से एक है।
उन्होंने बताया कि इसमें समुदाय की पवित्र उपवनों के संरक्षण की परंपरा को भी दर्शाया गया है, इसके अलावा लोहे से तैयार की जाने वाली ‘पिटवा’ शिल्पकला का इस्तेमाल किट के डिस्प्ले फ्रेम और घंटी बनाने में किया गया है।
अधिकारी ने बताया, ‘‘यह निमंत्रण किट उन कुशल शिल्पकारों और कारीगरों को समर्पित है, जो क्षेत्र की सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा व विविध सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए हैं।’
भाषा जितेंद्र खारी
खारी

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