गुवाहाटी, छह जुलाई (भाषा) असम विधानसभा में सोमवार को कांग्रेस, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ), रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने तीन विभिन्न मुद्दों पर पेश किए गए स्थगन प्रस्तावों को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा खारिज किए जाने के बाद सदन से बहिर्गमन किया।
बजट सत्र के पहले दिन नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के वाजेद अली चौधरी ने अनियमित बिजली आपूर्ति को लेकर स्थगन प्रस्ताव उठाया। उन्होंने कहा, ‘‘इस भीषण गर्मी में लोग बार-बार बिजली कटौती से परेशान हैं। सरकार द्वारा चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति के दावे के बावजूद स्थिति खराब है। यह एक अत्यंत गंभीर स्थिति है, जिसपर अन्य कार्यों को स्थगित करके विस्तृत चर्चा की जानी चाहिए।’’
रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई ने पिछले चार वर्षों में सरकारी विद्यालयों में नामांकन अनुपात में गिरावट की ओर सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले चार वर्षों में सरकारी और प्रावधिक विद्यालयों में 25,67,793 छात्रों की कमी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में भी दर्ज है।’’
गोगोई ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इस गिरावट को लेकर राज्य शिक्षा विभाग को कई बार चेतावनी दी, लेकिन कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा शिक्षा विभाग खतरे में है। शिक्षा क्षेत्र की रक्षा के लिए मैं अनुरोध करता हूं कि अन्य सभी कार्य स्थगित करके इस समस्या पर चर्चा की जाए।’’
एआईयूडीएफ विधायक मजीबुर रहमान ने कहा कि हाल के महीनों में बहुत से लोगों को देश में गैर-कानूनी तरीके से घुसने का आरोप लगाकर बांग्लादेश वापस भेजा गया। उन्होंने कहा, ‘‘अगर वे वास्तव में घुसपैठिए हैं, तो ठीक है, लेकिन कई मामलों में, असली भारतीय नागरिकों को धकेलकर ‘नो मैन्स लैंड’ पर बिना किसी देखभाल के छोड़ दिया जाता है। यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भी उल्लंघन है।’’
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गोलपाड़ा के निरुद्ध केंद्र से कई व्यक्ति लापता हो गए हैं, जिसपर तत्काल चर्चा की आवश्यकता है।
तीनों प्रस्तावों को सुनने के बाद अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने कहा, ‘‘मुझे कांग्रेस और रायजोर दल से दो स्थगन प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। हालांकि ये जनहित से जुड़े मुद्दे हैं, लेकिन ये अत्यावश्यक प्रकृति के नहीं हैं।’’
उन्होंने कहा कि चूंकि बजट सत्र की अवधि लंबी है, इसलिए इन विषयों पर अन्य संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से चर्चा की जा सकती है।
विधानसभा अध्यक्ष दास ने कहा, ‘‘एआईयूडीएफ का नोटिस निर्धारित समय के बाद प्राप्त हुआ था। यह मामला नियम 54 के तहत पहले ही उठाया जा चुका है। इसलिए स्थगन प्रस्ताव की आवश्यकता नहीं है। अतः मैं सभी तीनों नोटिस को खारिज करता हूं।’’
इस पर विरोध जताते हुए सभी विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी की और सदन के बीचोंबीच पहुंच गए। उन्होंने तख्तियां भी दिखाईं।
विधानसभा अध्यक्ष ने प्रदर्शनकारी सदस्यों से कहा, ‘‘नियम 275 के अनुसार आप सदन के भीतर तख्तियां नहीं दिखा सकते और नारेबाजी नहीं कर सकते।’’
इसके बाद सदन के मार्शल ने विपक्षी सदस्यों से तख्तियां ले लीं। तब विपक्षी सदस्यों ने कुछ समय के लिए सदन से बहिर्गमन किया। हालांकि वे बाद में वापस लौट आए।
भाषा अमित सुरेश
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