Ram Mandir Trust Meeting | Photo Credit: AI
अयोध्या: Ram Mandir Trust Meeting श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अयोध्या में राम मंदिर परिसर में आज एक बड़ी बैठक हुई है। बैठक करीब तीन घंटे तक चली। बैठक के बाद कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस (Govind Dev Giri Press Conference) कर फैसलों की जानकारी दी है।
Ram Mandir Trust Meeting बैठक के बाद कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बताया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा की श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से छुट्टी हो गई है। कोषाध्यक्ष गोविंद देव ने बताया कि ट्रस्ट की बैठक में दोनों का त्यागपत्र मंजूर कर लिया है। चंपत राय की जगह ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन अंतरिम महासचिव होंगे।
गोविंद देव ने कहा कि चंपत राय ने कहा है कि जब तक अपराधी पकड़े नहीं जाते तब तक पद पर रहना सही नहीं है। जो हुआ वह कष्टदायी है। इससे हम सब दुखी हैं। चढ़ावा चोरी लज्जाजनक घटना है।
राम मंदिर को दान में मिला जिन चीजों के चोरी होने का आरोप लगा वो सभी चीज मंदिर ट्रस्ट के प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल में रखी गई हैं? इनमें सोने की रामायण, भगवान के चरण चिन्ह, हार और कागभुसुंडि शामिल हैं।
गोविंद देव गिरी ने कहा हमारा काम पूरी पारदर्शिता रखना है। हम 22 जुलाई को फिर से बैठेंगे। तब तक एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी। चोरी तो चोरी ही है, छिपे हुए अपराधी खोजे जाएंगे। एसआईटी अपना काम कर रही है।
राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा- रामलला के विशाल मंदिर के आज एक असाधारण स्थिति बन गई। इसमें निर्णय लिया कि न्यास की बैठक 11 जुलाई वाली को 6 जुलाई को किया गया। कोरम पूरा रहा। अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास भी उपस्थित रहे। निर्मोही अखाड़े के संत दिनेंद्र जी महाराज भी थे। के परासरन भी ऑनलाइन थे। हमें दुख था कि जिसका सामना पूरे समाज को करना पड़ रहा है। वह दुखदायक है। मंदिर के लिए लोगों ने प्राणों, परिवार की परवाह नहीं की। चढ़ावा चोरी अर्थ लज्जाजनक हालत है।
गोविंद देव गिरी ने कहा- चढ़ावा चोरी की घटना से चंपत राय को बहुत वेदना हुई। उन्हें लगा कि जब तक न्याय नहीं हो जाता, अपराधी पकड़े नहीं जाते, उन्हें दंड नहीं मिल जाता, यह सोचकर उन्होंने त्याग पत्र दिया। जिसे मान्य करना, न मान्य करना हमारे बस की बात नहीं थी। इसलिए इस न्यास के संविधान के अनुसार- त्याग पत्र देते ही उसे मान लिया जाता है। इसलिए मूल प्रॉसेस को आधार मानकर उनके इस्तीफे को स्वीकार किया गया है। इसलिए इसे माना गया है।