असम: नगांव की दो महिलाओं को विदेशी घोषित कर गोलपाड़ा स्थित ‘ट्रांजिट कैंप’ में भेजा गया

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असम: नगांव की दो महिलाओं को विदेशी घोषित कर गोलपाड़ा स्थित ‘ट्रांजिट कैंप’ में भेजा गया

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  • Publish Date - June 7, 2026 / 10:04 PM IST,
    Updated On - June 7, 2026 / 10:04 PM IST

नगांव (असम), सात जून (भाषा) असम के नगांव जिले की दो महिलाओं को विदेशी घोषित कर गोलपाड़ा जिले के एक ‘ट्रांजिट कैंप’ में भेज दिया गया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि बागारीगोरी गांव की जहानआरा बेगम और डागांव की ममताज बेगम नामक दो महिलाओं ने भारतीय नागरिकता का दावा किया है, लेकिन अपने माता-पिता के वैध दस्तावेज होने के बावजूद, वे ग्राम प्रधानों के प्रमाण पत्रों के बजाय शैक्षिक और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज विरासत दस्तावेजों के रूप में प्रस्तुत करने में असमर्थ रहीं।

जहानआरा की ओर से पेश अधिवक्ता जाहिदुल हक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दोनों को सबसे पहले वर्ष 2019 में जूरिया विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) ने विदेशी घोषित किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद विदेशी न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती देते हुए गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अलग-अलग याचिकाएं दायर की गईं। उच्च न्यायालय ने 24 अप्रैल को अपने आदेश में इन मामलों को पुनर्विचार के लिए जूरिया विदेशी न्यायाधिकरण को वापस भेज दिया था।’’

हक ने कहा कि बाद में न्यायाधिकरण ने उनके परिवारों के वैध दस्तावेज होने के बावजूद उन्हें विदेशी घोषित कर दिया, क्योंकि वे संबंध साबित करने वाले दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद अधिकारियों ने पिछले सप्ताह उन्हें ‘ट्रांजिट कैंप’ भेज दिया। अब हम सभी कानूनी विकल्पों का आकलन कर रहे हैं।’’

हक ने बताया कि जहानआरा के खिलाफ मामला वर्ष 2016 में विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) में दायर किया गया था, जबकि ममताज के खिलाफ मामला 2015 में दायर किया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘उनके दावों को खारिज किए जाने का कारण ग्राम प्रधान (गांव बुड़ा) के प्रमाणपत्रों के अलावा अन्य वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाना था। उनके पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं हैं और अशिक्षा के कारण उनके पास शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी नहीं हैं।’’

हक ने कहा कि विदेशी न्यायाधिकरण ने ग्राम प्रधानों द्वारा जारी प्रमाणपत्रों को अस्वीकार करते हुए दोनों महिलाओं को विदेशी घोषित कर दिया।

इस बीच, सदाउ असम ग्रामीण श्रमिक संस्था (एसएजीएसएस) और गणतंत्र सुरक्षा मंच (जीएसएम) ने आरोप लगाया है कि विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) ने ‘‘गुवाहाटी उच्च न्यायालय के फैसले की अनदेखी करते हुए’’ दोनों ‘‘भारतीय नागरिकों’’ को ‘ट्रांजिट कैंप’ भेज दिया।

हक ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि वर्ष 2019 में विदेशी न्यायाधिकरण का फैसला दस्तावेजों में उपलब्ध साक्ष्यों पर समुचित चर्चा किए बिना दिया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए उस फैसले को निरस्त कर दिया गया और मामले को पुनर्विचार के लिए जूरिया विदेशी न्यायाधिकरण को वापस भेज दिया गया। याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ नामित जूरिया विदेशी न्यायाधिकरण के समक्ष उपस्थित होने और आवश्यक दस्तावेज जमा करने का भी निर्देश दिया गया था।’’

हक ने आरोप लगाया कि न्यायाधिकरण ने दोनों महिलाओं को विदेशी घोषित करने और उन्हें गोलपाड़ा स्थित ‘ट्रांजिट कैंप’ भेजने का नया आदेश पारित करने से पहले मामले की विस्तृत सुनवाई नहीं की।

भाषा

राखी दिलीप

दिलीप