ठाणे में डॉक्टरों पर हमला: न्यायालय ने जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर म्हात्रे को नोटिस दिया
ठाणे में डॉक्टरों पर हमला: न्यायालय ने जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर म्हात्रे को नोटिस दिया
नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को जुलाई में ठाणे के एक अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे से, उनकी जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा। अदालत ने कहा कि ऐसे लोग सड़कों पर घूमने के लायक नहीं हैं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने म्हात्रे को नोटिस जारी किया और राज्य सरकार की याचिका पर तीन हफ्ते में उनसे जवाब मांगा।
पीठ ने नोटिस जारी करते हुए कहा, ‘‘ऐसे लोग सड़कों पर घूमने के लायक नहीं हैं। हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। कल पालघर में एक और घटना हुई। वही लोगों का समूह। फिर से डॉक्टरों के साथ मारपीट। एक संदेश जाना चाहिए, और यह समाज में दूसरों के लिए एक सबक होना चाहिए।’’
मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
पीठ म्हात्रे की याचिका समेत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें पार्षद पर जमानत की शर्तें लगाने के मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी। बाद में उच्चतम न्यायालय ने शिवसेना पार्षद को अपनी अपील वापस लेने की इजाज़त दे दी।
उच्चतम न्यायालय ने पहले कहा था कि उच्च न्यायालय का स्वतः संज्ञान लेना और अधीनस्थ अदालत द्वारा म्हात्रे को दी गई जमानत पर रोक लगाना ‘‘पूरी तरह से सही’’ था। अदालत ने यह भी कहा कि डॉक्टरों पर हमला करने वाले जमानत के हकदार नहीं हैं।
गत 18 जुलाई को उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा दी गई ज़मानत पर रोक लगा दी थी, आदेश को ‘गलत’ बताया था और म्हात्रे को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने को कहा था।
बाद में, सात अगस्त को उच्च न्यायालय ने म्हात्रे को जमानत दे दी और आदेश दिया कि मुकदमा तेजी से चलाया जाए और तय समय में पूरा किया जाए।
भाषा वैभव मनीषा
मनीषा

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