कोलकाता, चार जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के नेता बाबुल सुप्रियो ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया मंच पर भावुक पोस्ट लिख अपने राजनीतिक करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहीं पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के प्रति समर्थन व्यक्त किया और वादा किया कि वह ‘‘ बुरे समय में’’ उनके साथ खड़े रहेंगे।
सुप्रियो ने एक दिन पहले ही तृणमूल के बागी नेताओं को ‘सांप’ कहकर आड़े हाथ लिया था और ममता बनर्जी का बचाव किया था।
गायन के पेशे से राजनीति में आए सुप्रियो ने पिछले दो दिनों में फेसबुक पर दो लंबी पोस्ट लिख ममता बनर्जी का जोरदार तरीके से बचाव किया, बागी नेताओं पर हमला किया, अपनी उथल-पुथल भरी राजनीतिक यात्रा के अनुभवों को साझा किया और पश्चिम बंगाल के तेजी से बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच अपनी स्थिति को लेकर चल रही अटकलों को दूर करने की कोशिश की।
उन्होंने अपने नवीनतम पोस्ट में ममता बनर्जी का साथ छोड़ने की आशंका को समाप्त करने की कोशिश की।
सुप्रियो ने ममता बनर्जी की मौजूदा मुश्किलों के बावजूद उनके साथ खड़े रहने की घोषणा की। उन्होंने साथ ही उन नेताओं पर जमकर निशाना साधा, जो कभी तृणमूल सुप्रीमो के करीब आने के लिए होड़ करते थे, लेकिन पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद अब उनका साथ छोड़ रहे हैं।
उन्होंने ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए लिखा, ‘‘हालात चाहे जो भी हों, मैं दीदी के साथ हूं।’’
मौजूदा समय में पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सदस्य सुप्रियो ने आरोप लगाया कि जो नेता अब ममता बनर्जी की आलोचना कर रहे हैं, वे एक समय तृणमूल के सत्ता में रहने के दौरान पद और लाभ हासिल करने के लिए कुछ भी करने को तैयार थे।
उन्होंने कहा, ‘‘वही लोग अब उन्हें धोखा दे रहे हैं।’’
सांसद ने ऐसे नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने उस नेता को छोड़ दिया है जिसने उनके राजनीतिक करियर को बनाने में मदद की थी।
सुप्रियो की ये टिप्पणियां तृणमूल में बगावत होने और उनके द्वारा कड़े शब्दों वाला संदेश पोस्ट करने के एक दिन बाद आईं।
उन्होंने दलील दी कि जिन निर्वाचित प्रतिनिधियों ने उस पार्टी के खिलाफ विद्रोह किया है जिसके चुनाव चिह्न पर वे चुने गए थे, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए और नया जनादेश मांगना चाहिए। उन्होंने कई बागी विधायकों पर तीखा हमला किया।
सुप्रियो ने किसी का नाम लिए बिना एक बागी नेता को ‘‘इंसान के वेश में एक सांप’’ बताया। इस टिप्पणी को राजनीतिक हलकों में व्यापक रूप से विभाजन के सूत्रधारों में से एक को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल शब्द के रूप में व्याख्यायित किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी का विरोध करने वाले कई लोग भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जुड़े होने के बावजूद राजनीतिक रूप से फले-फूले हैं।
सुप्रियो ने लिखा, ‘‘दीदी ने निश्चित रूप से इनमें से कुछ लोगों के खिलाफ अधिक सख्ती से कार्रवाई न करके एक गंभीर गलती की है।’’
सुप्रियो की ये दोनों पोस्ट मिलकर न केवल राजनीतिक रुख को प्रतिबिंबित करती हैं, बल्कि उनके स्वयं के राजनीतिक विकास का एक अत्यंत व्यक्तिगत विवरण भी प्रस्तुत करती हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने याद किया कि कैसे उन्होंने 22 साल की उम्र में एक सुरक्षित कॉर्पोरेट करियर छोड़कर संगीत में अपना करियर बनाया और स्थिरता के बजाय अनिश्चितता को चुना।
उन्होंने 2021 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को नाटकीय रूप से छोड़ने और तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की परिस्थितियों को भी याद किया।
सुप्रियो के मुताबिक भाजपा के भीतर हो रहे घटनाक्रम से निराश होकर उन्होंने लगभग राजनीति छोड़ने का फैसला कर लिया था और मुंबई लौटकर संगीत पर ध्यान केंद्रित करने की तैयारी कर रहे थे, तभी तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ‘ब्रायन उनसे दिल्ली में मिलने आए।
उन्होंने बताया कि ओ‘ब्रायन ने ममता बनर्जी का यह संदेश दिया कि वह नहीं चाहतीं कि वह ‘‘रिटायरड हर्ट’ (क्रिकेट की शब्दावली में घायल होने की वजह से खेल के बीच में ही मैदान से बाहर होना)हो जाएं और उनका मानना था कि वह राजनीति के माध्यम से बंगाल के लोगों की सेवा करना जारी रख सकते हैं।
सुप्रियो ने यह भी बताया कि ममता बनर्जी ने एक सांसद के रूप में उनके द्वारा राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर विकास परियोजनाओं को सुगम बनाने के प्रयासों की सराहना की थी, जिसमें पूर्व-पश्चिम मेट्रो परियोजना से संबंधित मामले भी शामिल थे।
सुप्रियो ने दावा किया कि उन्होंने कभी कोई गलत काम नहीं किया है और इसलिए उन्हें प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या आयकर विभाग जैसी एजेंसियों से डरने का कोई कारण नहीं है।
उन्होंने हालांकि ममता बनर्जी का बचाव करने के साथ ही राजनीतिक विरोधियों के प्रति सुलह का रुख अपनाते हुए कहा कि उनके अधिकांश वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ सौहार्दपूर्ण व्यक्तिगत संबंध बने हुए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे दिलीप घोष ने ईडन गार्डन्स में एक आईपीएल मैच के दौरान उनके बुजुर्ग पिता का गर्मजोशी से स्वागत किया था।
हाल के दिनों में सुप्रियो के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही थी।
सांसद ने हालांकि अपनी नवीनतम पोस्ट का समापन यह घोषणा करते हुए किया कि वह अपने फोन से फेसबुक को हटा रहे हैं और प्रतिक्रिया वाले हिस्से को निष्क्रिय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी टीम इस मंच का उपयोग केवल उनके संगीत को साझा करने के लिए करेगी।
सुप्रियो का राजनीतिक सफर भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री से लेकर तृणमूल नेता, तृणमूल सरकार में मंत्री और राज्यसभा सदस्य तक का रहा है। उनका संदेश स्पष्ट है कि वह ममता बनर्जी के साथ उनके राजनीतिक करियर के संभवतः सबसे कठिन दौर में भी बने रहने का इरादा रखते हैं,जबकि कई लोग नई राजनीतिक व्यवस्था में अपनी निष्ठाओं का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं।
भाषा धीरज नरेश
नरेश