(शुजा उल हक)
नयी दिल्ली, 10 मई (भाषा) प्रमुख बलूच कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने कहा है कि बलोच चरमपंथी नहीं हैं और न ही वे धर्म के नाम पर हिंसा करते हैं।
मीर ने फिल्म ‘धुरंधर’ में बलूच समुदाय के चित्रण की आलोचना करते हुए कहा कि यह उनकी ऐतिहासिक और सामाजिक वास्तविकताओं से पूरी तरह कटा हुआ है।
मीर ने कहा कि फिल्म के पहले भाग के कई दृश्य देखकर वह “गहराई से विचलित” हुए थे, जिसके बाद उन्होंने पांच दिसंबर को फिल्म रिलीज होने पर ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, “बलूच लोग चरमपंथी नहीं हैं और न ही वे धर्म या सांप्रदायिक नारों के नाम पर हिंसा करते हैं।”
उन्होंने कहा, “मैं उस दृश्य से बेहद परेशान हुआ जिसमें अक्षय खन्ना द्वारा निभाए गए रहमान बलूच नामक किरदार को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ बैठकर 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के दौरान ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते हुए प्रदर्शित किया गया है। यह चित्रण न केवल भ्रामक है, बल्कि बलूच राष्ट्र की ऐतिहासिक और सामाजिक वास्तविकताओं से पूरी तरह अलग है।”
पाकिस्तान के कराची के लियारी इलाके की पृष्ठभूमि पर बनी ‘धुरंधर’ एक भारतीय जासूस और रॉ एजेंट जसकीरत सिंह रंगी की कहानी है। रणवीर सिंह द्वारा निभाया गया हमजा अली मजारी का किरदार स्थानीय आपराधिक गिरोह में अपनी जगह बनाता है, जिस गिरोह का नेतृत्व रहमान डकैत करता है।
फिल्म में दिखाया गया है कि वह कराची के अपराध जगत और राजनीतिक तंत्र में घुसकर भारत को निशाना बनाने वाले आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने की कोशिश करता है। इसकी कहानी 1999 के आईसी-814 विमान अपहरण, 2001 के भारतीय संसद पर हमले और 2008 के मुंबई आतंकी हमलों जैसी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित बताई गई है।
‘धुरंधर’ और मार्च में रिलीज हूई इस फिल्म की दूसरी कड़ी, भारत में बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल कर चुकी हैं।
मीर के अनुसार, फिल्म के दूसरे भाग में बलूच समुदाय के चित्रण में “काफी सुधार” किया गया, जबकि पहले भाग में कई दृश्य वास्तविकता से बहुत दूर और “पूरी तरह अव्यावहारिक” थे।
उन्होंने फिल्म में इस संकेत पर भी आपत्ति जताई कि 26/11 हमलों में इस्तेमाल हथियार किसी बलूच स्वतंत्रता सेनानी ने उपलब्ध कराए थे।
मीर ने कहा, “बलूच मुक्ति आंदोलन से जुड़े लड़ाके कड़े अनुशासन, त्याग और अडिग सिद्धांतों के तहत काम करते हैं। वे अपनी जान दे सकते हैं, लेकिन कभी अपने हथियार नहीं बेचेंगे, उन्हें युद्धक्षेत्र में नहीं छोड़ेंगे और न ही निजी लाभ के लिए अपने उद्देश्य से समझौता करेंगे। वास्तव में बलूच लड़ाके खुद हथियारों और संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहे हैं।”
मीर ने कहा, “इसके अलावा यह दिखाना कि बलूच लड़ाके भारत विरोधी ताकतों को हथियार मुहैया कराएंगे, पूरी तरह अव्यावहारिक और राजनीतिक वास्तविकताओं के विपरीत है, क्योंकि बलूच लोग भारत को लंबे समय से मित्र और रणनीतिक साझेदार मानते हैं।”
मीर ने कहा कि वह फिल्म में संजय दत्त द्वारा निभाए गए पाकिस्तानी पुलिस अधिकारी एसपी असलम चौधरी के एक संवाद से विशेष रूप से आहत हुए, जिसमें बलूच लोगों की तुलना मगरमच्छ से की गई है।
उन्होंने कहा कि इस संवाद ने “बलूच समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है।”
मीर ने कहा, “निष्ठा, सम्मान और ईमानदारी बलूच की पहचान और संस्कृति के सबसे पवित्र नींव में शामिल हैं। बलूच लोग सबसे कठिन परिस्थितियों में भी अपनी बात पर कायम रहने के लिए जाने जाते हैं।”
उन्होंने कहा, “इसके जवाब में हमने दुनिया को एक प्रसिद्ध बलूची कहावत की याद दिलायी कि- ‘बलूच संस्कृति में एक कटोरे पानी की कीमत सौ वर्षों की वफादारी के बराबर होती है।’ यह सदियों पुराने सम्मान, भरोसे और अटूट प्रतिबद्धता की परंपरा को दर्शाता है।”
मीर ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के हस्तक्षेप का स्वागत किया, जिसने बलूच समुदायों के विरोध के बाद फिल्म निर्माताओं को उस संवाद में “बलूच” शब्द म्यूट करने का निर्देश दिया था।
जनवरी में फिल्म की टीम ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से बदलावों की मंजूरी मांगी थी, जिसमें संवाद से “बलोच” और “इंटेलिजेंस” शब्द हटाना शामिल था।
बलूच समुदाय के चित्रण पर आपत्तियों के बावजूद मीर ने स्वीकार किया कि फिल्म ‘धुरंधर’ पाकिस्तानी द्वारा बलूच समुदाय के खिलाफ की गई हिंसा की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रशंसा की पात्र है।
उन्होंने बताया कि उन्होंने इस फिल्म की दूसरी कड़ी धुरंधर: द रिवेंज भी देखी है, जो 19 मार्च को रिलीज हुई थी और 1,837 करोड़ रुपये से अधिक की वैश्विक कमाई के साथ अब तक की दूसरी सबसे अधिक कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बन चुकी है। पहले भाग ने 1,300 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया था।
मीर ने कहा, “पहले भाग की तुलना में इसमें काफी सुधार हुआ है। इसमें ऐसा कोई आपत्तिजनक दृश्य नहीं था, जो बलूचिस्तान और भारत के संबंधों को नकारात्मक रूप में दिखाए या बलूच राष्ट्रीय आंदोलन की छवि को विकृत करे।”
भाषा
राखी संतोष
संतोष