बांग्लादेश निर्वासित की गईं दो महिलाओं के परिजन को दो-दो लाख रुपये दिए जाने का आदेश

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बांग्लादेश निर्वासित की गईं दो महिलाओं के परिजन को दो-दो लाख रुपये दिए जाने का आदेश

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  • Publish Date - September 9, 2026 / 05:57 PM IST,
    Updated On - September 9, 2026 / 05:57 PM IST

गुवाहाटी, नौ सितंबर (भाषा) गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम सरकार को निर्देश दिया है कि वह बांग्लादेश निर्वासित की गईं दो महिलाओं के परिजन को अंतरिम मुआवजे के तौर पर दो-दो लाख रुपये का भुगतान करे। इन महिलाओं को विदेशी नागरिकता न्यायाधिकरण ने गैर-नागरिक घोषित कर दिया था और परिवार को उनके निर्वासन की सूचना दिए बिना उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया था।

दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति कल्याण राय सुराना और न्यायमूर्ति सुष्मिता फूकन खौंद की खंडपीठ ने तीन सितंबर के अपने आदेश में दो महिलाओं मुमताज बेगम और जहांआरा बेगम के मामलों में विदेश मंत्रालय को पक्षकार बनाया।

दोनों महिलाओं को नगांव के जुरिया स्थित न्यायाधिकरण ने गैर-नागरिक घोषित किया था। मुमताज बेगम के मामले में उनके पति मुज्जमिल हक ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जबकि जहांआरा बेगम के मामले में उनके बेटे मुजाहिदुल इस्लाम ने याचिका दाखिल की थी।

पीठ ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा की गारंटी केवल नागरिकों को ही नहीं, बल्कि गैर-नागरिकों को भी देता है।

पीठ ने कहा कि महिलाओं को संबंधित न्यायाधिकरण द्वारा नागरिकता के संबंध में दिए गए आदेश को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने से वंचित कर दिया गया।

मुमताज बेगम को 2015 में दर्ज एक मामले में छह जून, 2019 को न्यायाधिकरण ने विदेशी घोषित किया था।

दोनों समान आदेशों में खंडपीठ ने कहा, ‘‘चूंकि हिरासत में रखे गए व्यक्ति को याचिकाकर्ता या उसके परिवार के किसी वयस्क सदस्य को सूचना दिए बिना भारत से निर्वासित कर दिया गया, इसलिए अंतरिम राहत के तौर पर अदालत असम सरकार को याचिकाकर्ताओं को दो-दो लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश देना उचित समझती है।’’

यह मुआवजा अदालत के आदेश की प्रति प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर भुगतान किया जाना है।

पीठ ने यह भी कहा कि मामले में विदेश मंत्रालय को पक्षकार बनाना आवश्यक है, ‘‘ताकि अगली तारीख पर बांग्लादेश में महिलाओं का पता लगाने, उन्हें वापस लाने और उन्हें अपना कानूनी उपाय अपनाने का अवसर देने के लिए आवश्यक आदेश/निर्देश जारी किए जा सकें।’’

उच्च न्यायालय ने कहा कि दोनों मामलों में अधिकारी महिलाओं को न्यायाधिकरण के आदेशों की प्रतियां उपलब्ध कराने में विफल रहे और न ही उनके परिवार के वयस्क सदस्यों को उनकी गिरफ्तारी तथा निर्वासन के बारे में सूचित किया गया।

पीठ ने दोनों मामलों की अगली सुनवाई 24 सितंबर के लिए सूचीबद्ध की।

भाषा शफीक अविनाश

अविनाश