तृणमूल के नाम व चुनाव चिह्न पर रोक लगाना ‘‘लोकतंत्र के लिए काला दिन’’, आखिर तक लड़ेंगे : ममता
तृणमूल के नाम व चुनाव चिह्न पर रोक लगाना ‘‘लोकतंत्र के लिए काला दिन’’, आखिर तक लड़ेंगे : ममता
कोलकाता, 18 सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर रोक लगाने के निर्वाचन आयोग के फैसले की शुक्रवार को तीखी आलोचना की और इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास में ‘‘काला दिन’’ बताते हुए इसका राजनीतिक, लोकतांत्रिक तथा कानूनी तौर पर मुकाबला करने का संकल्प लिया।
इसके पहले निर्वाचन आयोग ने कहा कि पश्चिम बंगाल में छह अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नीत खेमे को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ जबकि अरूप रॉय गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
ममता बनर्जी ने कहा कि वह अंतरिम व्यवस्था को समझौते के तौर पर स्वीकार नहीं करेंगी और वह पार्टी की असली पहचान एवं चुनाव चिह्न वापस पाने के लिए संघर्ष करेंगी।
उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी (आप) के अरविंद केजरीवाल ने उनसे संपर्क किया है।
यह घटनाक्रम राज्य में एक नाटकीय राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हुआ, जिसमें ममता बनर्जी नीट गुट ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला किया, जब उसकी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपना नामांकन वापस ले लिया।
ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘…फिर भी, हम संविधान या संवैधानिक संस्थाओं का अपमान नहीं करते। लेकिन हमें लगता है कि आज हमारे देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक काला दिन है।’’
उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्रवाई को ‘‘असंवैधानिक, अवैध, अलोकतांत्रिक और पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण’’ बताया तथा राजनीतिक द्वेष की भावना का आरोप लगाया।
ममता ने फैसले के समय को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि उपचुनाव की प्रक्रिया पहले से ही जारी थी, नामांकन पूरे हो चुके थे और उम्मीदवारों ने अपने चुनाव चिह्न जमा कर दिए थे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम हार नहीं मानेंगे। हम राजनीतिक दबाव के आगे सिर नहीं झुकाएंगे। हम यह लड़ाई लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से लड़ेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नहीं छोड़ सकती। यह ऐसी पार्टी है जिसे मैंने 29 साल के संघर्ष, त्याग और राजनीतिक लड़ाइयों से बनाया है। जब तक मैं जीवित हूं, यह पार्टी मेरा हिस्सा रहेगी, और यह हमारे कार्यकर्ताओं के साथ रहेगी।’’
ममता ने विरोधी खेमे के संगठन से जुड़े दावों पर भी सवाल उठाया और कहा कि उनके ((ममता) गुट ने ज़मीनी स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हुए चुनावों से जुड़े दस्तावेज जमा कराए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष ने वैसा ही संगठनात्मक चुनाव नहीं कराया और पार्टी की पहचान के उसके दावे को खारिज किया।
आयोग की कार्रवाई का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने शहर के एक होटल में चुनाव निकाय टीम तथा विरोधी गुट के सदस्यों की बैठक पर भी सवाल उठाया।
ममता ने भाजपा पर निशाना साधते हुए उस पर विपक्षी दलों को कमज़ोर बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘पहले उन्होंने उद्धव ठाकरे की पार्टी तोड़ी और फिर राकांपा को। अब, वे हमारे पीछे पड़े हैं।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी और दूसरे संस्थानों का इस्तेमाल विपक्षी दलों खिलाफ किया गया। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए।
संविधान का हवाला देते हुए, ममता ने तर्क दिया कि राजनीतिक दल और नागरिकों को संगठित होने तथा आज़ादी से घूमने का हक है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं खुद को एक आम नागरिक मानती हूं। एक आम नागरिक होने के नाते भी, मुझे आज़ादी का हक है।’’
उन्होंने पार्टी के कुछ पुराने नेताओं पर भी निशाना साधा जो भाजपा में शामिल हो गए हैं। ममता ने इसे ‘‘वाशिंग मशीन’’ राजनीतिक करार देते हुए कहा कि वे लोग राजनीतिक संरक्षण और मामलों से राहत पाने के लिए भाजपा में शामिल हो गए।
ममता ने संकेत दिया कि उनकी चुनावी लड़ाई सिर्फ पार्टी की नयी पहचान तक ही सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि उनका गुट बड़े राष्ट्रीय हित में और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ को मजबूत करने के लिए नंदीग्राम तथा असम में कांग्रेस का समर्थन करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘राहुल जी ने मुझसे बात की है। अरविंद जी और दूसरे नेताओं ने भी हमसे बातचीत की है। हम मिलकर यह राजनीतिक लड़ाई लड़ेंगे।’’
भाषा अविनाश नेत्रपाल
नेत्रपाल

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