नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने अधिवक्ता अधिनियम संशोधन विधेयक-2026 का मसौदा पेश किया है, जिसमें महिलाओं के लिए वैधानिक प्रतिनिधित्व और वकीलों के वास्ते बेहतर सामाजिक सुरक्षा का प्रावधान किया गया है।
बीसीआई अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा के हस्ताक्षर वाले एक परिपत्र में कहा गया है, “बीसीआई ने एक ऐसा मसौदा तैयार किया है, जो भारतीय अधिवक्ताओं की सुरक्षा, संगठित बार को मजबूत करने और कानूनी पेशे में नये अवसर पैदा करने की दिशा में पेशे को प्राथमिकता देने वाला एक ऐतिहासिक सुधार है।”
विधि समुदाय को संबोधित 18 जुलाई के इस परिपत्र में 31 जुलाई को दोपहर तीन बजे तक सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।
परिपत्र में कहा गया है कि प्रस्तावित संशोधन “अधिवक्ता अधिनियम-1961 के लागू होने के बाद भारतीय कानूनी पेशे को नियंत्रित करने वाले वैधानिक ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में किए गए सबसे व्यापक प्रयासों में से एक है।”
मसौदा विधेयक में बीसीआई ने राज्य बार काउंसिलों (एसबीसी) में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने का प्रस्ताव किया है।
इसमें जिन बार काउंसिल में मतदाताओं की संख्या 10,000 से अधिक है, वहां सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 33 करने का प्रावधान है, जिनमें चार निर्वाचित महिला सदस्यों को शामिल करना और बार एसोसिएशन से परामर्श के बाद तीन अतिरिक्त महिला अधिवक्ताओं को मनोनीत करना अनिवार्य होगा।
मसौदा विधेयक में भौगोलिक रूप से उपेक्षित इलाकों को प्रतिनिधित्व देने के लिए ‘मनोनीत करने’ की व्यवस्था शुरू करने का प्रावधान किया गया है, क्योंकि एसबीसी चुनावों में अक्सर इन इलाकों को प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता है।
इसमें जरूरतमंद अधिवक्ताओं को वित्तीय सहायता, पेंशन, बीमा, चिकित्सा सहायता तथा आर्थिक रूप से कमजोर एवं दिव्यांग अधिवक्ताओं को आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए खास फंड और ट्रस्ट बनाने का भी प्रस्ताव किया गया है।
भाषा पारुल रंजन
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