UCC Provisions in Madhya Pradesh: ‘बिना तलाक लिए दूसरी शादी गैर कानूनी, मुस्लिम महिलाओं…’ मध्यप्रदेश में UCC लागू होते ही बदल जाएंगे ये नियम, सीएम मोहन यादव ने बताया किसे होगा फायदा

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UCC Provisions in Madhya Pradesh: 'बिना तलाक लिए दूसरी शादी गैर कानूनी, मुस्लिम महिलाओं...' मध्यप्रदेश में UCC लागू होते ही बदल जाएंगे ये नियम, सीएम मोहन यादव ने बताया किसे होगा फायदा

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 10:14 AM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 10:15 AM IST

UCC Provisions in Madhya Pradesh: 'बिना तलाक लिए दूसरी शादी गैर कानूनी, मुस्लिम महिलाओं...' मध्यप्रदेश में UCC लागू होते ही बदल जाएंगे ये नियम, सीएम मोहन यादव ने बताया किसे होगा फायदा / Image: AI Generated

HIGHLIGHTS
  • मध्यप्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता विधेयक विधानसभा में पेश
  • बिना वैधानिक तलाक दूसरा विवाह गैर-कानूनी होगा
  • CC का लाभ विशेषकर मुस्लिम महिलाओं को

भोपाल: UCC Provisions in Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर राम, रहीम, रविन्दर और रॉबिन सभी के लिए एक कानून की बात कही जा रही है। इस संबंध में विधानसभा के पटल पर विधेयक प्रस्तुत हुआ है, जो वर्षाकालीन सत्र में कानून का रूप लेगा। मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने इसे 19 जुलाई को स्वीकृति दी थी। उम्मीद है, भविष्य में इसके लाभ से सभी को लाभान्वित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीवी चैनल प्रतिनिधियों से चर्चा में कहा कि समान नागरिक संहिता से सभी का भला सुनिश्चित होगा।

UCC से सभी नागरिकों को होगा लाभ

UCC Provisions in Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि समान नागरिक संहिता का लाभ सभी नागरिकों को प्राप्त होगा। सर्वाधिक लाभ मुस्लिम बहनों को होने वाला है। एक राष्ट्र, एक प्रधान, एक विधान और एक व्यवस्था के सिद्धांत पर कार्य हो रहा है। विवाह विच्छेद के बिना दूसरा विवाह नहीं किया जा सकेगा। इस संबंध में प्रदेश में उच्च स्तरीय समिति के गठन और पूरे प्रदेश में विचार- विमर्श करने के साथ ही सभी समुदायों के नागरिकों से सुझाव प्राप्त किए गए। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं का समर्थन मिला था। प्रदेश की बेहतरी के लिए विपक्ष सहित सभी वर्गों और पक्षों से सहयोग और एकजुटता की आशा की गई है।

बिना तलाक दूसरा विवाह गैर कानूनी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदशन में मध्यप्रदेश एक नया रिकार्ड बनाने जा रहा है। अलग-अलग धर्मों के अनुयायियों के लिए एक विवाह का कानून लागू होगा। वैधानिक रूप से तलाक लिए बिना दूसरा विवाह गैर कानूनी रहेगा। इसके लिए दंड का कानून भी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात ही इसकी आवश्यकता थी। अब जब मध्यप्रदेश में यह कानून लागू होने वाला है तो निश्चित ही ऐसे अवसर पर समस्त प्रदेशवासी बधाई के पात्र हैं।

UCC से जुड़ा विधेयक सदन में पेश

मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र का आगाज हो 20 जुलाई से शुरू हो चुका है। वहीं आज दूसरे दिन यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) समेत कई अहम मुद्दों पर नजर रहेगी। आपको बता दें कि कल समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा विधेयक सदन में पेश कर दिया गया था। मंत्री गौतम टेटवाल ने विधानसभा की कार्यवाही के दौरान यह बिल प्रस्तुत किया था। जिसके बाद अब इस पर आज चर्चा होगी। विधानसभा में आज उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा (Finance Minister Jagdish Devda) वित्त वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक (पूरक) बजट पेश करेंगे। इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 सदन में रखा जाएगा। कर्मचारियों के अधिकार और कार्यस्थलों के नियमन के लिए मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण (श्रम शक्ति) संहिता विधेयक 2026 पेश होगा।

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मध्यप्रदेश में UCC को लेकर क्या फैसला लिया गया है?

राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) से संबंधित विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया है, जिसे वर्षाकालीन सत्र में कानून का रूप देने की तैयारी है।

UCC लागू होने के बाद दूसरे विवाह को लेकर क्या नियम होगा?

मुख्यमंत्री के अनुसार, वैधानिक रूप से तलाक लिए बिना दूसरा विवाह गैर-कानूनी माना जाएगा और इसके उल्लंघन पर दंड का प्रावधान भी रहेगा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने UCC के क्या फायदे बताए हैं?

उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता से सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार मिलेंगे और महिलाओं, विशेषकर मुस्लिम महिलाओं, को इसका विशेष लाभ मिलेगा।

क्या UCC लागू करने से पहले लोगों से सुझाव लिए गए थे?

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विषय पर उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था और विभिन्न समुदायों से सुझाव लिए गए थे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने समर्थन दिया।

UCC का उद्देश्य क्या है?

सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और अन्य पारिवारिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।