जेल में कैदियों को पीटना बिल्कुल मंजूर नहीं है: दिल्ली उच्च न्यायालय

जेल में कैदियों को पीटना बिल्कुल मंजूर नहीं है: दिल्ली उच्च न्यायालय

जेल में कैदियों को पीटना बिल्कुल मंजूर नहीं है: दिल्ली उच्च न्यायालय
Modified Date: September 28, 2026 / 08:29 pm IST
Published Date: September 28, 2026 8:29 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) बंदियों की पिटाई के सिलसिले में जेल वार्डन को भविष्य में कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि जेल अधिकारियों द्वारा कैदियों के खिलाफ बेवजह हिंसा का इस्तेमाल बिल्कुल भी मंजूर नहीं है।

उच्च न्यायालय ने तिहाड़ जेल परिसर के 26 जून के सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद वार्डन को चेतावनी जारी की। इस फुटेज में कुछ कैदी आपस में झगड़ते हुए और अधिकारी उन्हें तितर-बितर करने के लिए मारते हुए नजर आ रहे हैं।

कैदियों के तितर-बितर होने के बाद, वार्डन जेल के और कर्मचारियों के साथ लौटा, कैदियों को उनकी कोठरियों से बाहर निकाला और उन्हें फिर से पीटना शुरू कर दिया। उच्च न्यायलाय ने इसे ‘गैर-जरूरी और अवांछित’ बताया।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट की खंडपीठ ने 23 सितंबर के आदेश में कहा, ‘‘सीसीटीवी फुटेज में दूसरी बार कैदियों की तरफ से वार्डन को कोई खतरा नहीं दिखता है। इसलिए, यह बात फिर से कही जा रही है कि हालात काबू में आने के बाद हिंसा और मारपीट का इस्तेमाल पूरी तरह से गैर-जरूरी था।’’

खंडपीठ ने वार्डन को चेतावनी दी है कि कैदियों के साथ बेवजह मारपीट या हिंसा करना बिल्कुल भी मंजूर नहीं है।

उन्हें यह भी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में अगर ऐसा व्यवहार दोहराया गया, तो अदालत सख़्त कार्रवाई करने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाएगी।

फुटेज में कोई ऑडियो नहीं था, लेकिन वार्डन का दावा था कि कैदी उनसे बात करते समय अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे।

इस पर खंडपीठ ने कहा, ‘‘भले ही ऐसा था, फिर भी कैदियों को डंडे से मारना – खासकर तब जब वे तितर-बितर हो चुके थे और अपनी कोठरियों में लौट आए थे – गैर-जरूरी था, क्योंकि जब वे अपनी-अपनी कोठरियों से बाहर आए थे, तो उनमें से कोई भी हथियारबंद नहीं था।’’

हालांकि सरकारी वकील ने कहा कि कैदियों के पास चाकू और सुई मिली थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में दूसरी बार कैदियों की तरफ से वार्डन को कोई खतरा नहीं दिखा।

उच्च न्यायालय एक ऐसे व्यक्ति की अपील पर सुनवाई कर रहा था जो नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहा है। वह तिहाड़ जेल में जून में हुई घटना में घायल हुए कैदियों में से एक था और उसकी बांह की हड्डी टूट गई थी।

उच्च न्यायालय ने कहा कि जेल प्रशासन की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार उस व्यक्ति के पास ‘फ्रैक्चर’ की सर्जरी कराने के लिए पैसे नहीं हैं। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि जेल में चिकित्सा अधिकारी उसकी जांच करें और जरूरत पड़ने पर उसका सरकारी अस्पताल में आगे का इलाज कराया जाए।

भाषा

राजकुमार नरेश

नरेश


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