न्यायालय ने नकली दवाओं पर रोक से जुड़ी याचिका को अधिकारियों के पास भेजने का निर्देश दिया
न्यायालय ने नकली दवाओं पर रोक से जुड़ी याचिका को अधिकारियों के पास भेजने का निर्देश दिया
नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को अपनी रजिस्ट्री को नकली और मिलावटी दवाओं के निर्माण तथा बिक्री पर रोक लगाने के लिए एक व्यापक ढांचा बनाने के अनुरोध वाली याचिका की प्रति संबंधित अधिकारियों को विचार के लिए भेजने का निर्देश दिया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय से सवाल किया, ‘‘क्या आपने यह याचिका दायर करने से पहले अधिकारियों को कोई सुझाव दिया था?’’
उपाध्याय ने मौजूदा व्यवस्था में ‘‘खालीपन’’ का जिक्र करते हुए कहा कि बेंगलुरु के कई अस्पतालों में नकली कैंसर रोधी दवाओं की आपूर्ति किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘हम आपकी याचिका को प्रतिवेदन के तौर पर संबंधित अधिकारियों को भेज देंगे। यहां याचिका लंबित रखने के बजाय यह अधिक प्रभावी होगा।’’
याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने याचिका दायर करने से पहले संबंधित अधिकारियों से संपर्क नहीं किया।
पीठ ने कहा, ‘‘ऐसे मामलों में जहां प्रतिवादियों को विभिन्न प्रकार की कार्रवाई करनी है, हम मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना इस याचिका का निपटारा कर रहे हैं। रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह याचिका की एक प्रति संबंधित अधिकारियों को विचार के लिए भेजे।’’
अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दायर जनहित याचिका में याचिकाकर्ता ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कानून एवं न्याय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालयों के अलावा सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तथा विधि आयोग को पक्षकार बनाया था।
याचिका में केंद्र और राज्यों को नकली दवाओं से जुड़े मामलों की जांच तीन महीने के भीतर पूरी करने और एक साल के भीतर मुकदमे का निपटारा सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया।
याचिका में तलाशी, जब्ती और नमूने लेने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी), जब्त दवाओं की समयबद्ध फॉरेंसिक जांच तथा जांच प्रक्रिया की अनिवार्य डिजिटल रिकॉर्डिंग और वीडियोग्राफी का भी अनुरोध किया गया।
याचिका में कहा गया है कि मिलावटी और नकली पेय पदार्थों तथा दवाओं के मामलों में जांच की कोई मानक प्रक्रिया, समयबद्ध सुनवाई और सजा की नीति नहीं है। इसमें कहा गया, ‘‘1940 से औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम लागू होने के बावजूद नकली दवाओं, सिरप, इंजेक्शन और टीकों की बिक्री और निर्माण लगातार बढ़ रहा है।’’
याचिका में केंद्र और राज्यों को तलाशी, जब्ती, नमूने लेने और सूची तैयार करने की कार्रवाई की अनिवार्य रूप से डिजिटल रिकॉर्डिंग और वीडियोग्राफी करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया।
भाषा आशीष नरेश
नरेश

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