कोलकाता, चार जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम इकाई अपने केंद्रीय नेता लाल सिंह आर्य द्वारा ‘अवैध बांग्लादेशियों’ और मतदाता पात्रता पर की गई टिप्पणियों से मतुआ समुदाय में पनपी नाराजगी के बाद रविवार को नुकसान की भरपाई की कोशिश करती नजर आई।
आर्य के बयान से राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पार्टी को यहां की मुख्य विपक्षी पार्टी पर सियासी हमला करने का नया हथियार मिल गया है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले किसी भी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं होना चाहिए।
आर्य ने पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, ‘‘जो भी बांग्लादेश से अवैध रूप से आया है, चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का हो, उसका नाम मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए।’’
आर्य की ये टिप्पणियां मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर शरणार्थी बहुल क्षेत्रों में बढ़ती चिंता के बीच आईं, जिसमें मतुआ समुदाय के कुछ वर्गों को चुनावों से पहले नाम हटाए जाने का डर है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सार्वजनिक रूप से आर्य की टिप्पणियों से पार्टी को अलग करते हुए उन्हें व्यक्तिगत विचार बताया। उन्होंने कहा कि आर्य की टिप्पणी पार्टी के आधिकारिक रुख को प्रतिबिंबित नहीं करती।
भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘पार्टी आर्य द्वारा दिए गए बयान का समर्थन नहीं करती है। यह भाजपा का आधिकारिक रुख नहीं है और उनका बयान इसके बिल्कुल विपरीत है। हम उनकी टिप्पणियों का समर्थन नहीं करते हैं।’’ उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि ‘‘इस तरह के अतिथियों का बंगाल भाजपा में संवाददाता सम्मेलन के लिए स्वागत नहीं है।’’
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राज्य इकाई ने केंद्रीय नेतृत्व को यह बता दिया है कि ऐसे नेताओं को मीडिया को संबोधित करने के लिए बंगाल नहीं भेजा जाना चाहिए।
केंद्र के एक पदाधिकारी की अवहेलना की दुर्लभ घटना के तहत भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने आर्य के संवाददाता सम्मेलन का वीडियो लिंक भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से हटा दिया।
आर्य ने राज्य के नेताओं के साथ पत्रकारों को संबोधित किया था।
पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व ने मतुआ और नामासुद्र समुदायों को स्पष्ट रूप से समर्थन का आश्वासन दिया है, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी हालिया कोलकाता यात्रा के दौरान सार्वजनिक रूप से कहा था कि शरणार्थियों को डरने की कोई जरूरत नहीं है।
आर्य के बयान पर पार्टी के भीतर असंतोष स्पष्ट रूप से देखने को मिला। भाजपा नेता सजल घोष ने आर्य से खुलकर असहमति जताते हुए कहा कि बांग्लादेश से आए शरणार्थियों को स्वतः ही अवैध करार नहीं दिया जाना चाहिए।
घोष ने कहा, ‘‘हम बांग्लादेश से आने वाले हर व्यक्ति को अवैध नहीं कहते। हिंदू शरणार्थी, शरणार्थी हैं, घुसपैठिए नहीं, और सरकार की घोषित नीति योग्य गैर-मुसलमानों को नागरिकता प्रदान करना है।’’
तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर तत्काल प्रतिक्रिया दी।
पार्टी के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या उसके राज्य नेताओं में केंद्रीय नेतृत्व पर सवाल उठाने का साहस है।
चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘यह भाजपा का असली चेहरा है। उनका निशाना बंगाली हैं, और सबसे ज्यादा नुकसान मतुआ समुदाय को होगा।’’ उन्होंने संकेत दिया कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी मतुआ बहुल क्षेत्रों में अपने प्रचार अभियान के दौरान आर्य के बयान को मुद्दा बनाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस घटना ने बंगाल भाजपा को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है।
भाषा धीरज सुरेश
सुरेश