बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा ने ‘अन्नपूर्णा योजना’ के विस्तृत आवेदन पत्र का बचाव किया

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बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा ने ‘अन्नपूर्णा योजना’ के विस्तृत आवेदन पत्र का बचाव किया

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  • Publish Date - May 29, 2026 / 11:08 AM IST,
    Updated On - May 29, 2026 / 11:08 AM IST

कोलकाता, 29 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष नकद अंतरण (डीबीटी) योजना ‘अन्नपूर्णा योजना’ के 12 पृष्ठों के विस्तृत आवेदन पत्र का बचाव करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस विस्तृत प्रक्रिया के जरिए यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कल्याणकारी योजनाओं का वित्तीय लाभ केवल भारतीय नागरिकों तक ही पहुंचे।

इस लंबे आवेदन पत्र में महिला लाभार्थियों से परिवार के प्रत्येक सदस्य के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गई है। इसे लेकर कई वर्गों ने आलोचना की है और कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि अत्यधिक दस्तावेजीकरण से कई वास्तविक लाभार्थी इस कल्याणकारी योजना का लाभ पाने से वंचित रह सकते हैं।

अग्निमित्रा ने आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार गैर-नागरिकों को राज्य की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अनुमति नहीं देगी।

उन्होंने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा, “क्या तृणमूल को लगता है कि भाजपा सरकार उन रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को लाभ देगी, जो बांग्लादेश सीमा के पास लंबी कतारों में खड़े हैं? हम अन्नपूर्णा योजना या किसी अन्य सरकारी योजना का लाभ उन लोगों तक नहीं पहुंचाना चाहते, जो भारतीय नागरिक नहीं हैं। यह हमारा पैसा है, आपका पैसा है, जनता का पैसा है। स्वाभाविक है कि हमें पूरी जानकारी चाहिए।”

महिला एवं बाल विकास तथा सामाजिक कल्याण मंत्री अग्निमित्रा ने कहा कि भाजपा को तृणमूल से “सबक” लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने तृणमूल पर पिछले 15 वर्ष से बंगाल के लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है।

भाजपा सरकार ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना के तहत राज्य की प्रत्येक पात्र महिला को हर महीने 3,000 रुपये देगी।

भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना की जगह ‘अन्नपूर्णा भंडार’ शुरू करने का वादा किया था।

‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं को 1,700 रुपये मिलते थे।

भाषा

प्रचेता सिम्मी

सिम्मी