बंगाल चुनाव: मतगणना के लिए केंद्रीय कर्मियों की नियुक्ति के खिलाफ याचिका पर अदालत ने सुनवाई पूरी की

Ads

बंगाल चुनाव: मतगणना के लिए केंद्रीय कर्मियों की नियुक्ति के खिलाफ याचिका पर अदालत ने सुनवाई पूरी की

  •  
  • Publish Date - April 30, 2026 / 08:10 PM IST,
    Updated On - April 30, 2026 / 08:10 PM IST

कोलकाता, 30 अप्रैल (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उस याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतगणना पर्यवेक्षक के रूप में केंद्रीय कर्मियों को नियुक्त करने के निर्वाचन आयोग के निर्देश को चुनौती दी गई है।

पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को हुआ था तथा मतों की गिनती चार मई को होगी।

याचिकाकर्ता के वकील कल्याण बनर्जी ने न्यायमूर्ति कृष्णा राव की अदालत के समक्ष कहा कि निर्वाचन आयोग की अधिसूचना में कहा गया है कि मतों की गिनती के दौरान अनियमितताओं की आशंका को देखते हुए, प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक टेबल पर मतगणना पर्यवेक्षकों और मतगणना सहायकों में से कम से कम एक केंद्र सरकार/सार्वजनिक क्षेत्र के केंद्रीय उपक्रमों का कर्मचारी होगा।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद बनर्जी ने दावा किया कि यह पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

याचिका को खारिज करने का अनुरोध करते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के वकील जिष्णु चौधरी ने अदालत के समक्ष कहा कि यह निर्वाचन आयोग द्वारा प्रयोग किए गए विवेक की न्यायिक जांच का प्रश्न है।

उन्होंने कहा कि चुनाव निकाय ने अपने विवेक से इस काम के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारियों का चयन किया है और यह किसी भी प्रकार से कानून के विरुद्ध कार्य नहीं है।

दक्षिण कोलकाता के कस्बा विधानसभा क्षेत्र में निर्वाचन आयोग द्वारा मतगणना केंद्र में अंतिम समय में बदलाव किए जाने का दावा करते हुए न्यायमूर्ति राव की अदालत में एक और याचिका दायर की गई।

याचिकाकर्ता एवं तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जावेद अहमद खान ने दावा किया कि कस्बा सीट के लिए मतगणना केंद्र को निर्वाचन क्षेत्र के भीतर स्थित गीतांजलि स्टेडियम से अलीपुर के बिहारीलाल कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया गया है।

निर्वाचन आयोग के वकील ने अदालत के समक्ष कहा कि मतगणना केंद्रों को सुव्यवस्थित करने के लिए स्थान बदला गया है।

चौधरी ने बताया कि पहले दस विधानसभा क्षेत्रों के लिए पांच मतगणना स्थल हुआ करते थे, लेकिन अब इन सीटों के लिए केवल एक ही स्थल है।

उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार, यदि चुनाव अधिकारी को किसी भी कारण से आवश्यक लगे तो वह मतगणना स्थल को बदल सकता है।

दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद, अदालत ने दोनों याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

भाषा नेत्रपाल नरेश

नरेश