Bengaluru Airport Gold Smuggling: प्राइवेट पार्ट में सोना लेकर जा रहे थे तस्कर, ऊपर से जो तरीका अपनाया… ऐसे खुला राज, देखकर अधिकारी भी रह गए दंग

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Bengaluru Airport Gold Smuggling: बेंगलुरु से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने सोने की तस्करी के एक बड़े और संगठित रैकेट का भंडाफोड़ किया है।

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  • Publish Date - April 9, 2026 / 10:26 AM IST,
    Updated On - April 9, 2026 / 10:40 AM IST

airport gold/ image source: ilyasilukhan x handle

HIGHLIGHTS
  • एयरपोर्ट पर 5 करोड़ का सोना बरामद
  • शरीर में छिपाकर की जा रही तस्करी
  • DRI ने 5 आरोपियों को पकड़ा

Bengaluru Airport Gold Smuggling: बेंगलुरु: बेंगलुरु से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने सोने की तस्करी के एक बड़े और संगठित रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य का 3.356 किलोग्राम उच्च शुद्धता वाला सोना बरामद किया गया है।

Kempegowda International Airport news: एयरपोर्ट पर 5 करोड़ का सोना बरामद

तस्करों ने जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए बेहद खतरनाक और असामान्य तरीका अपनाया था सोने को पेस्ट में बदलकर कैप्सूल के रूप में तैयार किया गया और फिर उसे शरीर के गुप्त हिस्सों में छिपाकर ले जाया जा रहा था। 6 और 7 अप्रैल को चलाए गए विशेष निगरानी अभियान के दौरान DRI ने टर्मिनल 2 से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिससे इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।

gold smuggling capsule method: DRI ने 5 आरोपियों को पकड़ा

जांच के दौरान सामने आई जानकारी ने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तस्करी सिंडिकेट ने एयरपोर्ट के अंदरूनी सिस्टम में ही सेंध लगा ली थी। खुलासा हुआ है कि एक एयरपोर्ट कर्मचारी भी इस गिरोह की मदद कर रहा था, जो अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर प्रतिबंधित क्षेत्रों से सोना बाहर निकलवाने में सहयोग करता था। तस्कर एयरपोर्ट के वॉशरूम और स्मोकिंग जोन जैसे कम निगरानी वाले स्थानों पर माल का आदान-प्रदान करते थे। इतना ही नहीं, पकड़े जाने से बचने के लिए इस गिरोह ने एक खास ‘पासकोड सिस्टम’ और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल किया, जिनमें भेजे गए संदेश कुछ समय बाद अपने आप डिलीट हो जाते थे।

प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह पूरा नेटवर्क किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है। इसमें विदेशी कनेक्शन, खासकर बांग्लादेशी नागरिकों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है, जो स्थानीय हैंडलर्स के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे थे। तस्कर अक्सर बेंगलुरु जैसे ट्रांजिट हब को चुनते थे, जहां लंबा ठहराव मिलने के कारण एयरपोर्ट के भीतर ही माल को सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर किया जा सके। फिलहाल DRI की टीमें इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचने और पूरे रैकेट को जड़ से खत्म करने के लिए गहन जांच में जुटी हुई हैं।

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