नयी दिल्ली, 10 अगस्त (भाषा) सरकार ने सोमवार को लोकसभा में खान एवं खनिजों से संबंधित नियमों में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया, जिसके तहत राज्यों को खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर लगाने से रोका जाएगा।
खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के जरिए केंद्र सरकार खनिज वाले क्षेत्रों में खनिज संपदा की मात्रा से संबंधित निर्धारित मानकों के अनुसार खनिज-युक्त भूमि के विनियमन को भी अपने नियंत्रण में लेने का प्रस्ताव करती है।
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच विधेयक पेश किया।
विपक्षी सदस्य अयोध्या के राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी पर चर्चा और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे।
विधेयक में कहा गया है, ‘‘राज्य सरकार द्वारा खनिज अधिकारों पर कोई कर, उपकर या ऐसा कोई अन्य शुल्क (किसी भी नाम से) नहीं लगाया जाएगा।’’
इसके प्रावधान खनिज-युक्त भूमि पर भी लागू होंगे। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों या प्रतिबंधों के अनुसार ही खनिज की मात्रा, उसके मूल्य, रॉयल्टी या किसी अन्य आधार पर ऐसी भूमि के संबंध में कोई कर या शुल्क लगाया जा सकेगा।
इस संबंध में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम में एक नई धारा जोड़ने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा, विधेयक में प्रावधान किया गया है कि 2026 के संशोधन अधिनियम के लागू होने से पहले ऐसा कोई कर, उपकर या अन्य शुल्क, जो राज्य सरकार के पास जमा नहीं किया गया हो या जिसकी वसूली उसके द्वारा नहीं की गई हो, उसे हर लिहाज से अवैध माना जाएगा।
विधेयक में कहा गया है, ‘‘हालांकि, ऐसे लागू होने से पहले खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर लगाया गया कोई कर, उपकर या अन्य शुल्क, जो पहले ही राज्य सरकार के पास जमा किया जा चुका है या उसके द्वारा वसूल किया जा चुका है, वापस करने योग्य नहीं होगा।’’
रेड्डी ने उद्देश्यों एवं कारणों के विवरण में कहा कि इन संशोधनों का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में राजकोषीय व्यवस्था को निश्चित, स्थिर और पूर्वानुमेय बनाना है। इससे राष्ट्रीय आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को बढ़ावा मिलेगा और अंततः 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को हासिल करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि खनिजों पर कर और शुल्क लगाने में क्षेत्रीय असमानता का सार्वजनिक हित पर असर पड़ता है।
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के नेता एन के प्रेमचंद्रन ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध किया और कहा कि यह संघवाद के खिलाफ है।
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