(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को निर्वाचन आयोग का रुख कर आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के नेता विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को भाजपा को वोट देने से रोकने के लिए डरा-धमका रहे हैं।
इस संबंध में एक अर्जी सौंपते हुए, भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से ममता बनर्जी को चुनाव प्रचार में भाग लेने से रोकने और तृणमूल नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश जारी करने की मांग की।
निर्वाचन आयोग कार्यालय में अधिकारियों से मिलने गए भाजपा के प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू, पीयूष गोयल और सुकांत मजूमदार तथा भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी और राज्यसभा सदस्य अरुण सिंह शामिल थे।
भाजपा ने ‘‘संवेदनशील और असुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्रों’’ में केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ाने की भी मांग की और दावा किया कि पश्चिम बंगाल पुलिस ‘अप्रभावी’ हो गई है क्योंकि उसकी सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ ‘मिलीभगत’ है।
भाजपा ने अपनी अर्जी में कहा, ‘‘राज्य प्रशासन और पुलिस द्वारा हिंसा या धमकी के सभी कृत्यों के खिलाफ निष्पक्ष और निर्णायक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षकों के रूप में अधिक आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को तैनात किया जाए। चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए मतदान और मतगणना प्रक्रियाओं की बारीकी से निगरानी की जाए।’’
केंद्र में सत्तारूढ़ दल ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान ममता बनर्जी द्वारा उत्तर बंगाल और राज्य के अन्य क्षेत्रों में कई सार्वजनिक रैलियों में दिए गए ‘‘गंभीर और परेशान करने वाले’’ सार्वजनिक बयानों की शृंखला ‘‘उकसावे, मतदाता को डराने और हिंसा के लिए अप्रत्यक्ष रूप से उकसाने की एक सुसंगत, खतरनाक और चिंताजनक परिपाटी’ को दर्शाती है, जिससे स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनावों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।’’
अर्जी में बनर्जी और तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा विभिन्न अवसरों पर दिए गए कथित बयानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि ये आदर्श आचार संहिता और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन हैं। भाजपा ने इसी के साथ निर्वाचन आयोग से उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया।
भाजपा ने ‘‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत उचित और ठोस कानूनी कार्यवाही शुरू करने की मांग की, जिसमें प्राथमिकी दर्ज करना भी शामिल है’’।
भाजपा ने आरोप लगाया कि 25 मार्च को उत्तरी बंगाल के मैनागुड़ी में एक जनसभा में ममता बनर्जी ने कहा था कि चुनाव के बाद, ‘‘नागरिक अपने घरों के बाहर पोस्टर लगाने के लिए मजबूर होंगे जिन पर लिखा होगा,‘मैं भाजपा का समर्थन नहीं करता’।’’
अर्जी में आरोप लगाया गया है कि इस तरह की टिप्पणियां राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मतदाता स्वायत्तता के लिए प्रत्यक्ष खतरा हैं।
इसमें कहा गया, ‘‘26 मार्च को पांडवेश्वर में, उन्होंने ‘एकजुट होकर प्रतिरोध करने’ के आह्वान को दोहराया और लोगों से आग्रह किया कि यदि कथित तौर पर किसी भी प्रकार का बल प्रयोग किया जाता है, तो मतदान और मतगणना के दिनों में ‘घर में जो कुछ भी है’ उसे लेकर बाहर आएं।’’
भाजपा ने कहा, ‘‘साथ ही, उन्होंने(बनर्जी ने) मतगणना प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर संदेह जताया, जिससे निर्वाचन आयोग और चुनावी प्रणाली में जनता का विश्वास कम हो गया।’’
मोइत्रा को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाया कि उन्होंने ‘‘पहले से ही अत्यधिक तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल में’’ लोगों के बीच ‘‘दरार पैदा करने के दुर्भावनापूर्ण इरादे’’ से एक भाषाई समूह को दूसरे के खिलाफ भड़काने की कोशिश की।
अर्जी में कहा गया, ‘‘28 मार्च को महुआ मोइत्रा ने कोलकाता में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि ‘‘जब आप ‘कालापानी’ (सेलुलर जेल, अंडमान) जाते हैं, तो आपको कौन दिखाई देता है? कालापानी में मारे गए और कैद किए गए लोगों में से 68 प्रतिशत बंगाली थे, उसके बाद पंजाबी थे। क्या आप वहां मौजूद किसी एक गुजराती का नाम बता सकते हैं?’’
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए रीजीजू ने कहा, ‘‘चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहीं ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित करने और चुनाव को हाईजैक करने के लिए अराजकता फैला रही हैं।’’
मंत्री ने कहा, ‘‘हमने निर्वाचन आयोग को विस्तार से बताया कि ममता बनर्जी किस तरह मतदाताओं को धमका रही हैं और कह रही हैं कि भाजपा को वोट देने वालों को बख्शा नहीं जाएगा… हमने इस संबंध में आयोग के अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की।’’
उन्होंने बताया कि आयोग ने प्रतिनिधिमंडल को ‘‘सकारात्मक जवाब’’ दिया और आश्वासन दिया कि पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
रीजीजू ने कहा कि बनर्जी, उनके मंत्री और तृणमूल कार्यकर्ता विधानसभा चुनावों में भाजपा के पक्ष में मतदान करने से रोकने के लिए लोगों को डरा-धमका रहे हैं।
बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है तथा मतगणना चार मई को होगी।
भाषा धीरज नरेश
नरेश