Amit Shah Speech On Naxalism/Image Credit: IBC24.in
Amit Shah Speech On Naxalism: नई दिल्लीः लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा हुई। यह चर्चा नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सरकार की दी गई 31 मार्च की समय सीमा समाप्त होने से एक दिन पहले हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देश की संसद को संबोधित किया। लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि रेड कॉरिडोर के 12 राज्यों और आदिवासी समाज की ओर से वह इस बहस के लिए धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी वर्षों से चाहते थे कि उनकी स्थिति संसद में उठे और दुनिया जाने, लेकिन लंबे समय तक उन्हें यह मौका नहीं मिला। अब उनकी आवाज राष्ट्रीय मंच पर पहुंची है।
केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने सदन में बताया कि, 2023 में छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनी और 2024 में केंद्र में सरकार बनाने के दो महीने बाद मैं छत्तीसगढ़ गया था। 24 अगस्त 2024 को नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य तय किया गया था। इसके बाद से ही इस दिशा में तेज़ कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म होगा। (Amit Shah Speech On Naxalism) उन्होंने कहा कि, तीन साल में सरकार को बड़ी सफलता मिली। पिछले तीन वर्षों में चलाए गए अभियानों में 706 नक्सली मारे गए। वहीं पिछले तीन सालों में 4839 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और 2218 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में “संवाद, सुरक्षा और समन्वय” की नीति अपनाई गई। इसमें स्थानीय लोगों से संवाद, सुरक्षा बलों की मजबूत तैनाती और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया।
Amit Shah Speech On Naxalism: केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने बताया कि, नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया गया। इस तकनीक में लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम, मोबाइल कॉल डिटेल एनालिसिस, फॉरेंसिक टीम की निगरानी से कई बड़े ऑपरेशन सफल हुए। इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि, नक्सलियों के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में कई बड़े अभियान चलाए गए। इन अभियानों में ऑपरेशन ऑक्टोपस (झारखंड, 2022), ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म (2022), ऑपरेशन चक्रबांधा (2022) और छत्तीसगढ़ में “ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट” जैसे ऑपरेशन चलाए गए। छत्तीसगढ़ में चलाए गए “ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट” को बड़ी सफलता माना जा रहा है।
ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट तहत जवानों को बड़ी सफलता मिली। 50 किलोमीटर लंबी पहाड़ी पर नक्सलियों का बड़ा कैंप मिला। इस पहाड़ी पर छत्तीसगढ़ की सीमा में पांच साल लड़ने के लायक हथियार, आईईडी बनाने की फैक्ट्रियां, पांच साल का अनाज वहां भरा था। बहुत गर्मी थी, पहाड़ पर 45 डिग्री टेंपरेचर था। (Amit Shah Speech On Naxalism) जवानों को पीने के लिए 300 ग्राम पानी देते थे। ब्लैक फॉरेस्ट ऑपरेशन 21 दिन चला और हमने पूरा असलहा जब्त कर लिया। इसी ने छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा में नक्सलवादी आंदोलन का अंत कर दिया। इस ऑपरेशन में 30 से अधिक नक्सली मारे गए, जबकि कई ने आत्मसमर्पण कर दिया।
Amit Shah Speech On Naxalism: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि, आदिवासियों के जरिए सत्ता हासिल करना नक्सल विचारधारा का मकसद था। उन्होंने आगे कहा कि, ये जो बड़ी घटना देश में आकार लेने जा रही है उसका श्रेय CAPF खासकर कोबरा, CRPF के जवान और छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस और वहां के स्थानीय आदिवासी बाशिंदों को जाता है। यहां पर वामपंथी उग्रवाद समाप्ता होने जा रहा है। इसमें वहां की जनता का भी बहुत बड़ा हाथ है। जो हजारों युवा मारे गए, जो जवान शहीद हो गए उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि, नक्सलियों की विचारधारा का विकास से कोई लेना-देना नहीं है। (Amit Shah Speech On Naxalism) जब हम आजाद हुए हमने कहा ‘सत्यमेव जयते’। सत्य की हमेशा विजय हो। इनका ध्रुव वाक्य है- सत्ता बंदूक की नली से निकलती है। यहां सत्ता शब्द का संबंध अपनी विचारधारा की विजय के लिए है। विचारधारा को आदिवासियों में फैलाकर सत्ता हासिल करने के लिए है। यहां विकास की कोई बात नहीं है।
Amit Shah Speech On Naxalism: लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि, नक्सलवाद का मूल कारण विकास नहीं, एक विचारधारा है। उन्होंने आगे कहा कि, सरकार ने ढेर सारी योजनाएं बनाईं लेकिन आपने (कांग्रेस) उन्हें इम्प्लीमेंट नहीं करने दिया। 12 राज्यों में रेड कॉरिडोर था। वहां कानून का शासन नहीं था। 12 करोड़ लोग गरीबी में जी रहे थे। किसी ने चिंता नहीं की। हजारों युवाओं की मौत हुई। एक NGO के मुताबिक, 20 हजार युवा मारे गए। लोग दिव्यांग हो गए। उन तक विकास नहीं पहुंचा।
गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि, इन सबके लिए कौन जिम्मेदार है। नक्सलवाद का मूल कारण विकास की डिमांड नहीं, एक विचारधारा है। राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के लिए 1970 से इंदिरा गांधी ने स्वीकार कर लिया कि, वामपंथी विचारधारा के कारण नक्सलवाद फैला। (Amit Shah Speech On Naxalism) प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकारा था कि जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट की तुलना में देश की आंतरिक सुरक्षा में सबसे बड़ी समस्या माओवादी है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में संबोधन देते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि 75 साल में 60 साल तो राज आपने किया तो आदिवासी विकास से क्यों बच गए। 60 साल तक घर, स्कूल, मोबाइल टॉवर नहीं पहुंचने दिया और अब हिसाब मांग रहे हो। अपने गिरेबान में झांककर देखिए।
Amit Shah Speech On Naxalism: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने वामपंथी उग्रवाद की विचारधारा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह समझना जरूरी है कि इस विचारधारा का मूल क्या है और इसका ध्रुव वाक्य क्या है। गृहमंत्री ने कहा कि भारत ने आजादी के बाद “सत्यमेव जयते” को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाया, जबकि नक्सल विचारधारा का आधार “सत्ता बंदूक की नली से निकलती है” जैसे सिद्धांत पर टिका है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह सोच हिंसा को बढ़ावा देती है।
अमित शाह ने कहा कि देश में कई लोग अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं, लेकिन भारत अब अंग्रेजों के शासनकाल में नहीं है, जहां सशस्त्र संघर्ष को जायज ठहराया जा सके। उन्होंने आदिवासी नायक बिरसा मुंडा का उदाहरण देते हुए कहा कि, उनकी तुलना नक्सलियों से करना पूरी तरह गलत है, (Amit Shah Speech On Naxalism) क्योंकि उन्होंने विदेशी शासन के खिलाफ संघर्ष किया था। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठें और एकजुट होकर देश से नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में काम करें। शाह ने यह भी आरोप लगाया कि नक्सली विचारधारा से जुड़े लोग अपने ही लोगों का खून बहाने में भी संकोच नहीं करते।
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