पश्चिम एशिया में संघर्ष से उर्वरक संयंत्रों के लिए गैस की कीमतों में 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी

Ads

पश्चिम एशिया में संघर्ष से उर्वरक संयंत्रों के लिए गैस की कीमतों में 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी

  •  
  • Publish Date - March 30, 2026 / 08:23 PM IST,
    Updated On - March 30, 2026 / 08:23 PM IST

नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण उर्वरक संयंत्रों के लिए अहम तत्व प्राकृतिक गैस की कीमतों में 60 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ने की संभावना है।

संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति लाइन में रुकावट आने से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति, इसकी मांग के मुकाबले 80 प्रतिशत तक सीमित हो गई है। प्राकृतिक गैस अमोनिया बनाने के लिए एक मुख्य तत्व है (और अमोनिया नाइट्रोजन-आधारित उर्वरकों का मूल तत्व है)।

इस कमी को पूरा करने के लिए, उर्वरक कंपनियां हाजिर या मौजूदा बाज़ार से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) खरीद रही हैं।

पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर एक अंतर-मंत्रालयीय संवाददाता सम्मेलन में उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा कि देश के पास आने वाले खरीफ मौसम में कृषि मांग को पूरा करने के लिए उर्वरक का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा स्थिति एक संवेदनशील स्थिति है, जिससे हमने बहुत ही रणनीतिक तरीके से निपटा है।’’

उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र — जो भारत की यूरिया की 20-30 प्रतिशत, डीएपी की 30 प्रतिशत और एलएनजी की 50 प्रतिशत ज़रूरतों को पूरा करता था — अभी भी प्रभावित है, जिसके कारण एलएनजी, अमोनिया और सल्फर जैसी आदान की लागत में बढ़ोतरी हुई है, साथ ही माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ गया है।

घरेलू यूरिया उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। हालांकि, इसके प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों की कुल आवश्यकता लगभग 3.9 करोड़ टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह 3.61 करोड़ टन थी। उन्होंने बताया कि मौजूदा स्टॉक का स्तर लगभग 1.8 करोड़ टन है, जो पिछले साल इसी अवधि के 1.47 करोड़ टन से अधिक है। उन्होंने कहा कि अप्रैल और मई — जो आमतौर पर कृषि के लिहाज़ से सुस्त महीने होते हैं — का उपयोग बफर स्टॉक बनाने के लिए किया जा रहा है।

घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए, यूरिया संयंत्रों को गैस की आपूर्ति — जिसे शुरू में घटाकर लगभग 60 प्रतिशत कर दिया गया था — अब वैकल्पिक व्यवस्थाओं के माध्यम से बढ़ाकर 75-80 प्रतिशत तक कर दी गई है, जिससे उत्पादन बढ़ा है और उत्पादन में होने वाला नुकसान कम हुआ है। उन्होंने कहा कि कमी को हाजिर बाज़ार से एलएनजी खरीदकर पूरा किया जा रहा है।

उर्वरक संयंत्रों की हर दिन 5.2 करोड़ मानक घन मीटर गैस की ज़रूरत में से, लगभग 1.5 करोड़ मानक घन मीटर गैस हाजिर बाजार से खरीदी जा रही थी।

उन्होंने कहा कि हाजिर खरीदारी 19.5-19.6 डॉलर प्रति इकाई (मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट) की दर से की गई है, जबकि संकट से पहले के दौर में यह दर 11-12 डॉलर प्रति इकाई थी।

हालांकि, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सरकार वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों को मौजूदा कीमतों पर उर्वरक उपलब्ध कराती रहेगी और कहा कि अभी कोई तत्काल कमी या घबराने की कोई वजह नहीं है।

फीडस्टॉक की ज़्यादा लागत से सब्सिडी का बिल बढ़ जाएगा, लेकिन किसानों को यूरिया 266 रुपये प्रति 45 किलोग्राम और डीएपी का 50 किलोग्राम का बैग 1,350 रुपये में मिलता रहेगा।

उन्होंने बताया कि 1.8 करोड़ टन के मौजूदा स्टॉक में से 62 लाख टन यूरिया, 23.3 लाख टन डीएपी और 56 लाख टन पी एंड के उर्वरक हैं।

आयात के मामले में, सरकार ने विविधता लाने और आपूर्ति सुरक्षित करने के प्रयास तेज़ कर दिए हैं। 13.07 लाख टन यूरिया के लिए एक वैश्विक निविदा जारी की गई है, जबकि सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों के साथ लंबी अवधि के समझौते किए गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘खाड़ी देशों के अलावा अन्य देशों, जिनमें रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया और मिस्र शामिल हैं, से खरीद में विविधता लाने के लिए सक्रिय उपाय किए जा रहे हैं।’’

उपलब्धता, उत्पादन, आयात और लॉजिस्टिक्स की वास्तविक समय के आधार पर निगरानी करने के लिए एक समर्पित कार्यसमूह और एक आपातकालीन ‘वॉर रूम’ स्थापित किया गया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जमाखोरी, कालाबाज़ारी और गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाया गया है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय