तमिलनाडु: अदालत हिरासत में पिता-बेटे की मौत के मामले में दो अप्रैल को सुनाएगी सजा

Ads

तमिलनाडु: अदालत हिरासत में पिता-बेटे की मौत के मामले में दो अप्रैल को सुनाएगी सजा

  •  
  • Publish Date - March 30, 2026 / 07:55 PM IST,
    Updated On - March 30, 2026 / 07:55 PM IST

मदुरै, 30 मार्च (भाषा) तमिलनाडु के मदुरै की एक अदालत ने सथानकुलम में पिता-पुत्र की हिरासत में मौत के बहुचर्चित मामले में दोषी ठहराए गए नौ पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य, वित्तीय स्थिति एवं आचरण संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करने में हुई देरी के लिए सोमवार को केंद्र और राज्य सरकारों को फटकार लगाई।

अदालत दो अप्रैल को दोषियों को सजा सुनाएगी।

अदालत ने व्यापारी पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की 2020 में हिरासत में हुई मौत के मामले में 23 मार्च को नौ पुलिसकर्मियों को दोषी पाया था और अधिकारियों को 30 मार्च तक दोषियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, उनकी संपत्ति, वेतन विवरण और जेल से उनके आचरण संबंधी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था, ताकि सजा तय की जा सके।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुथुकुमारन ने सोमवार को मामले की सुनवाई शुरू होते ही अभियोजन पक्ष से सवाल किया कि मामले की गंभीरता के बावजूद अनिवार्य दस्तावेज दाखिल करने में देरी क्यों हुई।

अदालत ने पूर्व निरीक्षक श्रीधर और उपनिरीक्षक बालकृष्णन एवं रघु गणेश सहित सभी नौ आरोपियों को दोषी ठहराया था।

न्यायाधीश ने पूछा, “यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामला है। इन रिपोर्ट को दाखिल करने में देरी क्यों हो रही है?”

केंद्र और राज्य सरकारों के वकीलों ने दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया।

न्यायाधीश ने अंतिम अवसर देते हुए सुनवाई दो अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तब तक रिपोर्ट दाखिल करें।

रिपोर्ट जमा होने के बाद सजा सुनाए जाने की उम्मीद है।

यह घटना 19 जून, 2020 को उस समय हुई, जब जयराज और बेनिक्स को थूथुकुडी जिले के सथानकुलम थाने के पुलिसकर्मियों ने कोविड-19 संक्रमण के कारण लगाये गये लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए कथित तौर पर अपनी दुकान खुली रखने के आरोप में पूछताछ के वास्ते हिरासत में लिया था।

दोनों की कुछ दिनों बाद न्यायिक हिरासत में पुलिस की क्रूर यातनाओं के दौरान लगी चोटों के कारण कथित तौर पर मौत हो गई, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले की जांच के तहत 100 से अधिक गवाहों की गवाही के आधार पर 2,400 से अधिक पृष्ठों की विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया था।

भाषा जितेंद्र सुरेश

सुरेश