Amit Shah on Naxalism in Parliament: ‘कई बार नक्सलियों और उनके समर्थकों के साथ देखे गए राहुल गांधी’.. नेता प्रतिपक्ष पर अमित शाह का तीखा हमला, बताया देश से कैसे सिमटा नक्सलवाद

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'कई बार नक्सलियों और उनके समर्थकों के साथ देखे गए राहुल गांधी'.. नेता प्रतिपक्ष पर अमित शाह का तीखा हमला, Home Minister Amit Shah on Congress Leader Rahul Gandhi

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  • Publish Date - March 30, 2026 / 07:55 PM IST,
    Updated On - March 30, 2026 / 09:05 PM IST

Amit Shah Naxalism Speech Live/Image Credit: IBC24.in

नई दिल्लीः Amit Shah on Naxalism in Parliament: लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा हो रही है। इस चर्चा में हिस्सा लेते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सवालों का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने देश में नक्सलवाद की बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस सरकारों की जिम्मेदार बताया और इससे संबंधित कई तथ्य उन्होंने पेश किए। अमित शाह ने यूपीए सरकार के समय एनएसी का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी एक फोरम बनाई गई। हर्ष मंदर की अध्यक्षता वाले फोरम में एक शीर्ष नक्सली की पत्नी भी सदस्य थी। प्रधानमंत्री रूरल फेलोशिप का एक फेलो महेश राउत महाराष्ट्र में नक्सलियों के साथ संबंध के केस में पकड़ा गया। इसे छुड़ाने के लिए जयराम रमेश ने कांग्रेस के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। 76 जवान मारे गए थे और छत्तीसगढ़ में पी चिदंबरम जश्न में थे। पी चिदंबरम ने कहा कि हम तो आपसे हथियार छोड़ने को कहेंगे नहीं, आप हथियारबंद आजादी की लड़ाई में विश्वास करते हो। राहुल गांधी कई बार नक्सलियों और इनके समर्थकों के साथ देखे गए। हिडमा जब मारा गया, कितने हिडमा मारोगे के नारे लगे। राहुल गांधी ने इस वीडियो को खुद शेयर किया। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी राहुल गांधी नक्सल संगठनों से जुड़े लोगों के साथ देखे गए। कांग्रेस की नक्सल समर्थक विचारधारा इसकी जिम्मेदार है। यह बात यहां से रुकेगी नहीं, यह बात चुनाव तक जाएगी और इसका जवाब उनको देना पड़ेगा।

देश में कैसे सिमटा नक्सलवाद

Amit Shah on Naxalism in Parliament: अमित शाह ने कहा कि सीएपीएफ और राज्य पुलिस का समन्वय बढ़ाया। जिम्मेदारियां स्पष्ट कर दीं और ऑल एजेंसी अप्रोच शुरू किया। फंडिंग और सपोर्ट सिस्टम पर भी प्रहार किए। पुनर्वास योजना लेकर आए। विकास में कोई वैक्यूम नहीं छोड़ा। आज वहां राज्य की उपस्थिति है और नक्सलवाद की हार का सबसे बड़ा कारण यह है कि राज्य अब हर गांव में पहुंच गया है और वहां पंचायत का गठन हो चुका है। 20 अगस्त, 2019, 24 अगस्त 2024 और 31 मार्च 2026, तीन तिथियां बताना चाहता हूं। 20 अगस्त 2019 को गृह मंत्रालय में एक मीटिंग हुई। पूर्व नक्सलियों को खुफिया इनपुट में लेने का काम, ये सब उसी मीटिंग में डिजाइन किए गए। देर क्यों लगी, क्योंकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने नक्सलवादियों को बचाकर रखा। इस पर विपक्ष ने हंगामा किया। उन्होंने कहा कि मुझे किसी व्यक्ति के सामने नहीं करना है। भूपेश बघेल को पूछो प्रूफ दूं क्या यहां पर। हां बोलें तो बोलो, वरना फंस जाओगे। 2023 में छत्तीसगढ़ में सरकार बदली और दूसरे ही महीने वहां गया था। बीजेपी की सरकार ने पूरे सहयोग का आश्वासन दिया था। 24 अगस्त 2024 को हमने यह ऐलान किया कि 31 मार्च 2026 को हम नक्सलवाद पूरी तरह से समाप्त कर देंगे। अमित शाह ने 2014 के बाद उठाए गए कदम गिनाए और कहा कि कम्युनिकेशन की सारी व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त कर दी गई।

नक्सली चलाते थे जनताना सरकार

इस दौरान उन्होंने सदन में बताया कि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की जनताना सरकार चलती थी। वहां नक्सलियों का गृह मंत्री, खाद्य मंत्री, न्यायमंत्री होता था। माओवादी हर ठेके में 20 प्रतिशत जनताना टैक्स डालते रहे। उन्होंने कहा कि नक्सलियों की जनताना सरकारें विकास के कामों को रोकने का प्रयास किया। चुनाव होने नहीं दिए।
नक्सलियों के बातचीत को लेकर उन्होंने कहा कि बातचीत उन्हीं से होती है, जो हथियार डालता है। हमारी सरकार की पॉलिसी है कि हम गोलियों का जवाब गोलियों से देंगे।

कैसे फैला माओवाद

उन्होंने कहा कि देश के अंदर अन्याय हो तो हथियार उठाना यह लोकतांत्रिक नहीं है। उन्होंने सदन के सामने आंकड़े रखते हुए कहा कि 70 के दशक में नक्सलबाड़ी से इसकी शुरुआत हुई और एक ही साल के अंदर 3620 हिंसा की घटनाएं हुईं। फिर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और ओडिशा में नक्सलवाद फैला। वामपंथी पार्टियों में विलय शुरू हुआ और 2004 में दो प्रमुख गुट मिल गए। इसी दौरान सीपीआई (माओवादी) का गठन किया। 70 से 2004 तक चार साल छोड़कर कांग्रेस की पार्टी सत्ता में रही। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने वामपंथी उग्रवाद की विचारधारा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह समझना जरूरी है कि इस विचारधारा का मूल क्या है और इसका ध्रुव वाक्य क्या है। गृहमंत्री ने कहा कि भारत ने आजादी के बाद “सत्यमेव जयते” को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाया, जबकि नक्सल विचारधारा का आधार “सत्ता बंदूक की नली से निकलती है” जैसे सिद्धांत पर टिका है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह सोच हिंसा को बढ़ावा देती है।

नक्सलियों की तुलना आदिवासियों नायकों से करना गलत- शाह

अमित शाह ने कहा कि देश में कई लोग अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं, लेकिन भारत अब अंग्रेजों के शासनकाल में नहीं है, जहां सशस्त्र संघर्ष को जायज ठहराया जा सके। उन्होंने आदिवासी नायक बिरसा मुंडा का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी तुलना नक्सलियों से करना पूरी तरह गलत है, क्योंकि उन्होंने विदेशी शासन के खिलाफ संघर्ष किया था। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठें और एकजुट होकर देश से नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में काम करें। शाह ने यह भी आरोप लगाया कि नक्सली विचारधारा से जुड़े लोग अपने ही लोगों का खून बहाने में भी संकोच नहीं करते।

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