नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) निर्वाचन आयोग में जमा किये गए खर्च के ब्योरे के अनुसार, इस साल की शुरूआत में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा को अपने केंद्रीय मुख्यालय में लगभग 1,473 करोड़ रुपये मिले, जो कांग्रेस को उसकी केंद्रीय और प्रदेश इकाइयों से मिले कुल 207 करोड़ रुपये से सात गुना से भी अधिक रकम है।
कांग्रेस की असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के लिए कुल खर्च की रिपोर्ट पहले ही आ चुकी थी। पार्टी ने 15 मार्च से 6 मई तक की चुनावी अवधि के दौरान कुल 207.17 करोड़ रुपये प्राप्त होने और 248.55 करोड़ रुपये का खर्च बताया है।
इसके उलट, निर्वाचन आयोग द्वारा सार्वजनिक किये गए खर्च के ब्योरे के मुताबिक, भाजपा के 1,472.8 करोड़ रुपये के आंकड़े में उक्त अवधि के दौरान सिर्फ उसके केंद्रीय मुख्यालय को मिली रकम शामिल है।
केरल और पश्चिम बंगाल चुनावों के लिए पार्टी की खर्च रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं, जिसका मतलब है कि उसकी कुल प्राप्तियां इससे अधिक हो सकती हैं।
चुनाव के दौरान भाजपा के केंद्रीय मुख्यालय में मौजूद रकम में भी काफी बढ़ोतरी हुई। 15 मार्च को पार्टी के पास 6,722.6 करोड़ रुपये थे, जो 6 मई को बढ़कर 7,627.2 करोड़ रुपये हो गए। यानी चुनाव की अवधि के दौरान इसमें 904.6 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई।
दूसरी ओर, चुनाव के दौरान कांग्रेस के वित्त में कमी आई। पार्टी के केंद्रीय मुख्यालय और पांच प्रदेश इकाइयों के पास चुनाव की शुरुआत में लगभग 169.06 करोड़ रुपये (22.9 करोड़ रुपये नकद और 146.1 करोड़ रुपये बैंक खातों में) थे और चुनाव संपन्न होने पर यह राशि लगभग 103.2 करोड़ रुपये रह गई — यानी 65.86 करोड़ रुपये की कमी आई।
अब तक सामने आए भाजपा के खर्च के ब्योरे से पता चलता है कि पार्टी ने असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में लगभग 159.7 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें से करीब 130.4 करोड़ रुपये पार्टी के चुनावी प्रचार पर और बाकी रकम उम्मीदवारों व उनसे जुड़े खर्चों पर खर्च हुई।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा असम का था, जहां 96.27 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
इसमें से, 76.73 करोड़ रुपये पार्टी के प्रचार पर और 19.54 करोड़ रुपये उम्मीदवारों पर खर्च किए गए। प्रचार के खर्च में विज्ञापन और स्टार प्रचारकों की यात्रा का हिस्सा सबसे अधिक था। विज्ञापन पर लगभग 37 करोड़ रुपये और स्टार प्रचारकों की यात्रा पर 27.3 करोड़ रुपये खर्च हुए।
पार्टी ने तमिलनाडु में 51.56 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें से 44.51 करोड़ रुपये प्रचार पर और 7.05 करोड़ रुपये उम्मीदवारों पर खर्च हुए। मीडिया विज्ञापनों पर लगभग 23.96 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि स्टार प्रचारकों की यात्रा पर लगभग 10.04 करोड़ रुपये का खर्च आया। प्रचार सामग्री पर लगभग 5.85 करोड़ रुपये खर्च हुए।
पुडुचेरी में, भाजपा ने 11.90 करोड़ रुपये का खर्च बताया है — इसमें से 9.19 करोड़ रुपये प्रचार पर और 2.71 करोड़ रुपये उम्मीदवारों पर खर्च किए गए।
कांग्रेस ने सभी पांच राज्यों में पार्टी के प्रचार पर 143 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों पर 105.55 करोड़ रुपये खर्च करने की जानकारी दी, जिससे उसका कुल चुनावी खर्च 248.55 करोड़ रुपये हो गया।
कांग्रेस के केंद्रीय मुख्यालय ने पांच राज्यों में चुनाव प्रचार पर 40.52 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि उसकी राज्य और स्थानीय इकाइयों ने इस मद में 102.49 करोड़ रुपये और खर्च किए। केरल, जहां पार्टी ने वाम मोर्चा को सत्ता से बेदखल किया, इस खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा (59.28 करोड़ रुपये) वहां हुआ। इसके बाद असम का स्थान है, जहां 22.62 करोड़ रुपये खर्च किये गए।
भाषा सुभाष माधव
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