नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) मनरेगा को जारी रखे जाने की मांग संबंधी प्रस्ताव के तमिलनाडु विधानसभा से पारित होने के बाद, भाजपा ने शुक्रवार को द्रमुक और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या उस समय संविधान खतरे में नहीं है जब राज्य संसद की ओर से पारित कानून की ‘‘खुलेआम अवहेलना’’ कर रहे हैं।
‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी’ (वीबी-जी राम जी) के खिलाफ तमिलनाडु विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर मनरेगा को जारी रखे जाने की मांग की। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने ‘वीबी-जी राम जी’ अधिनियम के खिलाफ तमिलनाडु सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या किसी राज्य विधानसभा के पास संसद द्वारा पारित कानून के खिलाफ विधेयक पारित करने का संवैधानिक अधिकार है।
तमिलनाडु विधानसभा ने शुक्रवार को एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से राज्य की ग्रामीण आबादी की आजीविका की रक्षा के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) योजना को जारी रखने का आग्रह किया।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन द्वारा यह प्रस्ताव पेश किया गया था।
स्टालिन ने केंद्र द्वारा शुरू की गई नवीनतम ग्रामीण रोजगार योजना ‘वीबी-जी राम जी’ का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘प्रस्तावित नयी योजना ने मनरेगा की जगह ली है… यह पूरे भारत में ग्रामीण लोगों की आजीविका, राज्यों की वित्तीय संरचना, स्थानीय निकायों की आत्मनिर्भरता और ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों को कमजोर करती है।’’
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए त्रिवेदी ने पूछा, ‘‘यदि भारत की संसद द्वारा कोई विधेयक विधिवत पारित कर दिया गया है और उच्चतम न्यायालय ने न तो उस पर आपत्ति जताई है और न ही उस पर रोक लगाई है, तो क्या किसी राज्य विधानसभा के पास उसके विरुद्ध विधेयक पारित करने का संवैधानिक अधिकार है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं तमिलनाडु और केरल की सरकारों से यह पूछना चाहता हूं कि यदि आपकी राज्य विधानसभा कोई प्रस्ताव पारित करती है, तो क्या किसी जिला पंचायत या नगर निगम को यह अधिकार है कि वह ऐसा कानून पारित करे जिसमें कहा गया हो कि वह केरल या तमिलनाडु के कानूनों का पालन नहीं करेगा?’’
उन्होंने कहा, ‘‘यदि उत्तर ‘नहीं’ है, तो उन पर भी यही सिद्धांत लागू होता है।’’
त्रिवेदी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए उनसे पूछा कि क्या संविधान अब खतरे में नहीं है जब संसद द्वारा पारित किसी अधिनियम का ‘‘राज्य विधानसभाओं द्वारा संविधान और उसकी भावना के खिलाफ जाकर खुलेआम इस तरह से उल्लंघन किया जाता है ’’।
भाजपा नेता ने पूछा, ‘‘क्या अब संविधान खतरे में नहीं है? और क्या यह इस बात का प्रमाण नहीं है कि उनके लिए संविधान केवल एक ऐसी वस्तु है जिसे वे अपनी जेब में रखते हैं और सुविधा के अनुसार इसका इस्तेमाल करते हैं?’’
भाषा
देवेंद्र अविनाश
अविनाश