श्रीनगर, तीन मई (भाषा) पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने रविवार को दावा किया कि केंद्र में भाजपा सरकार और जम्मू-कश्मीर की नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार इस प्रदेश में इस्लामी संस्थानों और धार्मिक प्रतीकों को निशाना बनाकर उसकी अनूठी पहचान को मिटाने की कोशिश कर रही हैं।
महबूबा मुफ्ती ने गंदेरबल जिले में कार्यकर्ता सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘पहले उन्होंने मदीनातुल उलूम को बंद किया, जहां छात्रों को अरबी और धार्मिक शिक्षा दी जाती थी। अब उन्होंने सिराजुल उलूम को निशाना बनाया है, जहां धार्मिक और सांसारिक दोनों प्रकार की शिक्षा दी जाती थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र की भाजपा सरकार और जम्मू-कश्मीर में नेकां सरकार किसी विशेष उद्देश्य से प्रेरित होकर इन संस्थानों को बंद कर रही हैं। यह हमारी पहचान पर हमला है।’’
पीडीपी प्रमुख ने आरोप लगाया कि राजस्व विभाग में नियुक्तियों के लिए उर्दू भाषा की अनिवार्यता को हटाने का निर्णय जम्मू-कश्मीर की विशिष्ट पहचान को कमजोर करने की योजना का हिस्सा प्रतीत होता है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के इस बयान के बारे में पूछे जाने पर कि राजस्व विभाग की भर्ती के लिए उर्दू भाषा की अनिवार्यता नहीं हटाई गई है, पीडीपी प्रमुख ने कहा कि सरकार के मुखिया झूठ बोल रहे हैं।
मुफ्ती ने कहा, ‘‘वर्ष 2009 का एक आदेश है, जिसमें राजस्व विभाग में भर्ती के लिए उर्दू का ज्ञान अनिवार्य किया गया था। अब उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाले राजस्व विभाग द्वारा जारी 2026 का आदेश है, जिसमें कहा गया है कि केवल स्नातक होना ही आवश्यक है। इसमें उर्दू का कोई जिक्र नहीं है। अगर उमर साहब झूठ बोलना चाहें तो मैं क्या कर सकती हूं।’’
भाषा शफीक सुरेश
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