भाजपा ने निर्वाचन आयोग से ममता को चुनाव प्रचार से प्रतिबंधित करने का आग्रह किया

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भाजपा ने निर्वाचन आयोग से ममता को चुनाव प्रचार से प्रतिबंधित करने का आग्रह किया

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  • Publish Date - April 8, 2026 / 10:31 PM IST,
    Updated On - April 8, 2026 / 10:31 PM IST

नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) भाजपा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके सहयोगियों के कथित ‘‘भड़काऊ’’ बयानों को लेकर निर्वाचन आयोग के समक्ष चिंता व्यक्त करते हुए बुधवार को कहा कि राज्य में ‘‘अराजकता और भय’’ का माहौल बनाया जा रहा है तथा निष्पक्ष एवं भयमुक्त मतदान सुनिश्चित करने के लिए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

पार्टी ने निर्वाचन आयोग से केंद्रीय पुलिस बलों के खिलाफ टिप्पणियों के लिए प्राथमिकी दर्ज करने, बनर्जी पर अस्थायी तौर पर चुनाव प्रचार पाबंदी लगाने और राज्य में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) कर्मियों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।

भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें आरोप लगाया गया कि तृणमूल कांग्रेस नेता संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और राज्य में चुनाव ड्यूटी पर तैनात केंद्रीय बलों का मनोबल गिराने के प्रयास में ‘‘भड़काऊ’’ बयान दे रहे हैं।

प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार और अर्जुन राम मेघवाल भी शामिल थे।

मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कुमार ने आरोप लगाया कि बनर्जी और उनके सहयोगियों द्वारा राज्य में दिए गए बयान बेहद ‘‘शर्मनाक और निंदनीय’’ हैं और संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा कर रहे हैं तथा सुरक्षा कर्मियों के साथ टकराव को बढ़ावा दे रहे हैं।

कुमार ने कहा, ‘‘चुनाव के दौरान बंगाल में भय, आतंक और अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है। देश की संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास की भावना भी पैदा की जा रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब राज्य का शीर्ष नेतृत्व कहता है कि सीआरपीएफ की 200 कंपनियां आ रही हैं और लोगों को अपने घरों में जो कुछ भी उपलब्ध है – बर्तन, करछी या कोई भी घरेलू वस्तु – उनका इस्तेमाल करके उन्हें भगा देना चाहिए, तो यह बेहद चिंताजनक है।’’

कुमार ने दावा किया कि चुनावी जीत हासिल करने के लिए हिंसा का सुझाव देने वाली टिप्पणियां — जैसे कि हाथ-पैर तोड़ना या किसी भी तरह का हथकंडा अपनाना — मतदाताओं के बीच भय का माहौल पैदा कर रही हैं।

कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘जब नेता के परिवार का कोई सदस्य कहता है कि चुनाव जीतने के लिए लोगों के पैर, गर्दन और यहां तक ​​कि रीढ़ की हड्डी भी तोड़नी पड़ सकती है, और वे कुछ भी कर सकते हैं, तो ऐसे बयान बेहद चिंताजनक हैं और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास का माहौल बनाते हैं।’’

निर्वाचन आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में, भाजपा ने दावा किया कि बनर्जी ने 7 अप्रैल को एक रैली में कहा था कि ‘‘सीआरपीएफ के 200 वाहन आप लोगों पर हमला करने आ रहे हैं।’’

पार्टी ने इसे ‘‘अत्यंत भड़काऊ और देशद्रोहपूर्ण बयान’’ और मतदाताओं में भय और शत्रुता पैदा करने का प्रयास बताया।

भाजपा ने दावा किया कि 3 अप्रैल को दक्षिण दिनाजपुर में एक अन्य रैली में, उन्होंने केंद्रीय बलों पर पैसे पहुंचाने में लिप्त होने का आरोप लगाया।

पार्टी का दावा है कि ऐसे बयान सुरक्षा बलों को ‘‘आम लोगों के दुश्मन’’ के रूप में चित्रित करने, चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने और मतदान ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के खिलाफ हिंसा भड़काने का ‘‘जानबूझकर और सुनियोजित प्रयास’’ हैं।

ज्ञापन में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है, जिसमें उकसाने, आधिकारिक पद का दुरुपयोग करने और समूहों के बीच शत्रुता पैदा करना शामिल हैं।

भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से भड़काऊ बयान देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि पश्चिम बंगाल के मतदाता बिना किसी भय या दबाव के स्वतंत्र रूप से अपना वोट डाल सकें।

कुमार ने कहा, ‘‘हमने आयोग से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है कि लोगों को स्वतंत्र और शांतिपूर्ण तरीके से मतदान करने का अवसर मिले। ऐसे बयान देने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो और कार्रवाई की जानी चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि आयोग ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए जाएंगे और हिंसा या धमकी का कोई माहौल नहीं बनने दिया जाएगा।

बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में होना है, जिसके तहत 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा। मतगणना 4 मई को होगी।

भाषा सुभाष माधव

माधव