बंगाल चुनाव में भाजपा का खर्च चार राज्यों और पुडुचेरी में कांग्रेस के कुल खर्च से अधिक

बंगाल चुनाव में भाजपा का खर्च चार राज्यों और पुडुचेरी में कांग्रेस के कुल खर्च से अधिक

बंगाल चुनाव में भाजपा का खर्च चार राज्यों और पुडुचेरी में कांग्रेस के कुल खर्च से अधिक
Modified Date: September 24, 2026 / 12:44 pm IST
Published Date: September 24, 2026 12:44 pm IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी ने अकेले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 286.99 करोड़ रुपये खर्च किए, जो इस साल की शुरुआत में हुए चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनावों में कांग्रेस के कुल 248.55 करोड़ रुपये के खर्च से अधिक है। निर्वाचन आयोग को सौंपे गए खर्च संबंधी विवरण में इसकी जानकारी मिली है।

पांच राज्यों (असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी) के चुनावों में भाजपा के कुल 529.38 करोड़ रुपये के खर्च में आधे से अधिक हिस्सा पश्चिम बंगाल का रहा। पार्टी ने बंगाल में सामान्य प्रचार पर 217.16 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों पर 69.83 करोड़ रुपये खर्च किए।

भाजपा ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सत्ता से हटाकर पहली बार सरकार बनाई। घोषित किए गए 293 सीटों के परिणामों में भाजपा ने 207 सीटें जीतीं, जबकि टीएमसी को 80 सीटें मिलीं।

कांग्रेस ने राज्य में हाशिये की ताकत होने के बावजूद 293 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा और दो सीटें जीतीं। पार्टी ने बताया कि उसने अपने केंद्रीय मुख्यालय और राज्य इकाई के माध्यम से बंगाल में 42.08 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें 12.96 करोड़ रुपये सामान्य प्रचार और 29.12 करोड़ रुपये उम्मीदवारों तथा उनसे जुड़े खर्चों पर व्यय किए गए।

प्रदेश में 2011 में सत्ता गंवाने से पहले कई दशकों तक बंगाल पर शासन करने वाली माकपा ने 197 सीटों पर चुनाव लड़ा और एक सीट जीती। उसकी राज्य इकाई ने उम्मीदवारों पर किए गए खर्च समेत कुल 8.23 करोड़ रुपये के व्यय की जानकारी दी।

बंगाल में भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी रही तृणमूल कांग्रेस का खर्च विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

पार्टियों द्वारा घोषित खर्च के आधार पर केरल की स्थिति अलग रही। यहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे को सत्ता से हटाया। कांग्रेस ने 63 सीटें और माकपा ने 26 सीटें जीतीं। भाजपा को तीन सीटें मिलीं।

कांग्रेस ने केरल में अपने मुख्यालय और राज्य इकाई के माध्यम से 105.34 करोड़ रुपये खर्च किए, जो भाजपा के 82.67 करोड़ रुपये से अधिक है। कांग्रेस के खर्च में 71.30 करोड़ रुपये सामान्य प्रचार और 34.05 करोड़ रुपये उम्मीदवारों तथा उनसे जुड़े व्यय शामिल हैं।

भाजपा ने केरल में सामान्य प्रचार पर 54.93 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों पर 27.74 करोड़ रुपये खर्च किए।

केरल में प्रमुख राजनीतिक दल माकपा की राज्य इकाई ने 28.60 करोड़ रुपये खर्च करने की जानकारी दी। इसमें 26.30 करोड़ रुपये सामान्य प्रचार और 2.31 करोड़ रुपये उम्मीदवारों पर खर्च किए गए।

पांचों चुनावों में कांग्रेस ने प्रचार पर 143 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों पर 105.55 करोड़ रुपये खर्च किए, जिससे उसका कुल खर्च 248.55 करोड़ रुपये रहा। माकपा का कुल संयुक्त खर्च 39.04 करोड़ रुपये रहा।

भाजपा ने बंगाल और केरल के अलावा असम में 96.27 करोड़ रुपये, तमिलनाडु में 51.56 करोड़ रुपये और पुडुचेरी में 11.90 करोड़ रुपये खर्च किए।

इससे पहले दाखिल किए गए विवरणों के अनुसार, चुनाव अवधि के दौरान भाजपा के केंद्रीय मुख्यालय को 1,472.8 करोड़ रुपये मिले, जबकि कांग्रेस ने अपने मुख्यालय और पांच राज्य इकाइयों में कुल 207.17 करोड़ रुपये की प्राप्तियां दर्ज कीं।

चुनाव अवधि समाप्त होने पर भाजपा के केंद्रीय कार्यालय में 7,627.2 करोड़ रुपये की राशि थी, जो चुनावों की घोषणा के समय 6,722.6 करोड़ रुपये थी। इसी अवधि में कांग्रेस के मुख्यालय और पांच राज्य इकाइयों की संयुक्त शेष राशि करीब 169.06 करोड़ रुपये से घटकर 103.2 करोड़ रुपये रह गई।

भाषा रंजन मनीषा

मनीषा


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