केरल में वन्यजीवों के हमलों से सुरक्षा करने में एलडीएफ और यूडीएफ दोनों विफल: राजीव चंद्रशेखर

Ads

केरल में वन्यजीवों के हमलों से सुरक्षा करने में एलडीएफ और यूडीएफ दोनों विफल: राजीव चंद्रशेखर

  •  
  • Publish Date - June 8, 2026 / 07:44 PM IST,
    Updated On - June 8, 2026 / 07:44 PM IST

तिरुवनंतपुरम, आठ जून (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरल इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सोमवार को आरोप लगाया कि राज्य में वन्यजीवों के बढ़ते हमलों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सत्तारूढ़ कांग्रेस नीत यूडीएफ और विपक्षी माकपा नीत एलडीएफ दोनों ही विफल रहे हैं।

राज्य विधानसभा में नेमोम निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले चंद्रशेखर ने कहा कि जंगली जानवरों के हमलों से होने वाली मौतों और घायल होने की बढ़ती घटनाएं लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मौजूदा और पिछली सरकारों की अक्षमता को दर्शाती हैं।

उन्होंने दावा किया, “केरल में वन्यजीवों के हमलों की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं, लेकिन राज्य में बारी-बारी से शासन करने वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) दोनों ही लोगों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने में समान रूप से विफल रहे हैं।”

भाजपा नेता ने कहा कि पिछले दो सप्ताह में ही केरल में वन्यजीवों के हमलों में पांच लोगों की जान जा चुकी है।

उन्होंने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि संबंधित मंत्री ने कार्रवाई करने में विफल रहकर “घोर उदासीनता” दिखाई है।

इडुक्की जिले में सोमवार को हाथी के हमले में एक महिला की मौत का उल्लेख करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि इस घटना ने पूरे केरल को झकझोर दिया है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “अपने बेटे को स्कूल छोड़ने जाते समय जंगली हाथी के हमले में मारीयम्मल की मौत ने पूरे राज्य की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। हमले में घायल बच्चा अब भी उपचाराधीन है।”

उन्होंने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में लोग भय के साये में जी रहे हैं और सरकार उन्हें अपने ही गांवों में सुरक्षित जीवन जीने का मूल अधिकार प्रदान करने में विफल रही है।

सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत प्राप्त आंकड़ों का हवाला देते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि वर्ष 2016 से 2025 के बीच केरल में वन्यजीवों के हमलों में 1,128 लोगों की मौत हुई है और 8,480 लोग घायल हुए।

चंद्रशेखर ने कहा कि केंद्र सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता और आवश्यक अधिकार प्रदान किए हैं।

उन्होंने कहा कि बाड़, अवरोधक, त्वरित प्रतिक्रिया दल, संघर्ष संभावित क्षेत्रों की निगरानी और हाथी गलियारों के प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं के लिए राज्य सरकार को धन उपलब्ध कराया गया है।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया, “केरल अपनी शक्तियों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र द्वारा उपलब्ध कराए गए धन का समुचित इस्तेमाल करने में विफल रहा है।”

उन्होंने दावा किया कि पीड़ितों और उनके परिवारों को मिलने वाला मुआवजा अक्सर विलंब से मिलता है, जिसके कारण प्रभावित परिवारों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

चंद्रशेखर ने कहा, “यह किसी कल्याणकारी राज्य के अनुरूप नहीं है कि प्रभावित परिवार मुआवजे और सहायता के लिए महीनों तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटते रहें।”

उन्होंने केरल के दोनों प्रमुख राजनीतिक मोर्चों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि किसी ने भी इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला है।

उन्होंने कहा, “सत्ता बदलती रही है, लेकिन लोगों की परेशानियों में कोई बदलाव नहीं आया है।”

इस संबंध में तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए भाजपा नेता ने सरकार से ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली और वास्तविक समय चेतावनी तंत्र जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर वन्यजीवों के खतरे की पहले से पहचान करने की व्यवस्था करने का आग्रह किया।

उन्होंने आबादी वाले क्षेत्रों में खतरनाक जंगली जानवरों के प्रवेश को रोकने के लिए और अधिक प्रभावी उपाय करने की भी मांग की।

भाषा रवि कांत रवि कांत धीरज

धीरज