दिल्ली में पीएम 2.5 उत्सर्जन में बीएस-3, बीएस-4 ट्रकों का 62 फीसदी योगदान : रिपोर्ट
दिल्ली में पीएम 2.5 उत्सर्जन में बीएस-3, बीएस-4 ट्रकों का 62 फीसदी योगदान : रिपोर्ट
नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) दिल्ली में प्रवेश करने वाले ट्रकों से होने वाले कुल पीएम2.5 उत्सर्जन का 62 प्रतिशत हिस्सा बीएस-3 और बीएस-4 श्रेणी के ट्रकों से होता है। यह जानकारी एक रिपोर्ट से मिली है।
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली आने वाले सभी ट्रकों से प्रतिदिन कुल 52.18 किलोग्राम पीएम2.5 उत्सर्जित होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें बीएस-4 ट्रकों का योगदान 14.47 किलोग्राम, बीएस-3 ट्रकों का 17.90 किलोग्राम और बीएस-6 ट्रकों का योगदान 19.81 किलोग्राम है।
ये आंकड़े ‘टुवर्ड्स क्लीनर फ्रेट इन दिल्ली: असेसिंग इंटरस्टेट ट्रक एमिशंस एंड मिटिगेशन स्ट्रेटेजीज’ शीर्षक वाली विश्लेषणात्मक रिपोर्ट का हिस्सा हैं, जिसे सोमवार को जारी किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिदिन करीब 16,900 भारी मालवाहक ट्रक दिल्ली में प्रवेश करते हैं। इनमें लगभग 62 प्रतिशत ट्रक बीएस-6 मानकों के अनुरूप हैं, जबकि 28 प्रतिशत बीएस-4 और 10 प्रतिशत बीएस-3 अथवा उससे पुराने मानकों वाले हैं।
यह अध्ययन एयर पॉल्यूशन एक्शन ग्रुप (ए-पीएजी), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) ने संयुक्त रूप से किया है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि दिल्ली में प्रतिदिन प्रवेश करने वाले भारी मालवाहक ट्रकों का योगदान कुल दैनिक परिवहन-जनित उत्सर्जन में 23 प्रतिशत है। साथ ही तड़के और रात के समय यह हिस्सेदारी बढ़कर 61 प्रतिशत हो जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन भारी मालवाहक ट्रकों में 92 प्रतिशत ने दिल्ली को अपना गंतव्य बताया, जबकि केवल आठ प्रतिशत ट्रकों ने खुद को ‘बाईपास’ या पारगमन (ट्रांजिट) यातायात के रूप में चिह्नित किया।
एसोसिएट निदेशक (टेरी) डॉ. अंजू गोयल ने एक बयान में कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए क्षेत्रीय स्तर पर समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘माल ढुलाई शहरों की सीमाओं का पालन नहीं करती। दिल्ली में आने वाले अधिकांश ट्रक एनसीआर के राज्यों से आते हैं और वहीं लौटते हैं। ऐसे में केवल दिल्ली इस समस्या का समाधान नहीं कर सकती। केंद्र और राज्य स्तर के नीति-निर्माताओं को आंकड़ों पर आधारित साझा कार्ययोजना पर सहमति बनानी होगी।’’
रिपोर्ट में अपने निष्कर्षों के आधार पर सात सिफारिशें की गई हैं। इनमें कम-उत्सर्जन क्षेत्र (लो-एमिशन जोन) के माध्यम से केवल बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक (ईवी) ट्रकों को प्रवेश की अनुमति देकर वर्ष 2027 तक अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से बाहर करने की सिफारिश शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम से वर्ष 2027 तक पीएम2.5 उत्सर्जन में 51 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है।
भाषा अमित दिलीप
दिलीप

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