(तस्वीरों के साथ)
लेह, 30 अप्रैल (भाषा) लद्दाख में शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर गौतम बुद्ध के अवशेषों को लोगों के दर्शन के लिए रखा जाएगा। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बृहस्पतिवार को लद्दाख पहुंचे।
अधिकारियों ने बताया कि भारत में बुद्ध के अवशेषों को पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लद्दाख पहुंचे शाह का कुशोक बकुला रिंपोची हवाई अड्डे पर राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने स्वागत किया। इस मौके पर पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
अधिकारियों के मुताबिक, दो दिवसीय लद्दाख दौरे के दौरान शाह शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन करेंगे। उन्होंने बताया कि गृह मंत्री करगिल में 10 टीएलपीडी (हजार लीटर प्रति दिन) क्षमता वाले डेयरी संयंत्र की आधारशिला भी रखेंगे और डेयरी क्षेत्र से संबंधित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।
शाह ने बुधवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था, “एक मई को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर भारत में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्शन के लिए रखा जाएगा और इस कार्यक्रम में शामिल होना मेरी लिए बेहद सौभाग्य का पल है।”
उन्होंने लिखा था, “कार्यक्रम में दुनिया के विभिन्न हिस्सों के श्रद्धालु भगवान बुद्ध के अवशेषों के दर्शन करेंगे।”
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के पिपरहवा में मिले गौतम बुद्ध के पवित्र अवशेष बुधवार को हवाई मार्ग से दिल्ली से लेह लाए गए थे।
अधिकारियों के मुताबिक, माथो मठ के द्रुकपा थुकसे रिनपोचे और खेनपो थिनलास चोसल भारतीय वायुसेना के एक विशेष विमान से इन अवेशेषों को लेह लेकर पहुंचे थे।
उन्होंने बताया कि हवाई अड्डे पर उपराज्यपाल सक्सेना ने एक भव्य स्वागत समारोह के दौरान औपचारिक रूप से इन अवशेषों को स्वीकार किया था।
अधिकारियों के अनुसार, लद्दाख में ये अवशेष मई के शुरुआती दो हफ्तों में आम लोगों के दर्शन के लिए रखे जाएंगे।
हाल के वर्षों में इन अवशेषों का वैश्विक स्तर पर महत्व बढ़ गया है, विशेष रूप से जुलाई 2025 में एक ब्रिटिश परिवार और एक निजी संग्रह से संबंधित रत्नों और भेंटों का एक संग्रह भारत को वापस सौंपे जाने के बाद, जिससे एक सदी से अधिक के औपनिवेशिक कब्जे का अंत हुआ।
पिपरहवा में मिले गौतम बुद्ध के अवशेषों को इससे पहले थाईलैंड, मंगोलिया, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, भूटान, श्रीलंका और म्यांमा जैसे देशों में भी श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए ले जाया जा चुका है।
अधिकारियों ने बताया कि लद्दाख में ये अवशेष एक मई से 10 मई तक जीवेत्सल में सार्वजनिक दर्शन के लिए रखे जाएंगे। उन्होंने बताया कि 11-12 मई को इन्हें जांस्कर और 13-14 मई को लेह के धर्म केंद्र में लोगों के दर्शन के लिए रखा जाएगा। 15 मई को ये अवशेष हवाई मार्ग से वापस दिल्ली ले जाए जाएंगे, जहां इन्हें संरक्षित रखा गया है।
भाषा पारुल संतोष
संतोष