जमानत याचिकाओं पर गौर करते समय आरोपों की गंभीर प्रकृति की अनदेखी नहीं कर सकते: न्यायालय

Ads

जमानत याचिकाओं पर गौर करते समय आरोपों की गंभीर प्रकृति की अनदेखी नहीं कर सकते: न्यायालय

  •  
  • Publish Date - December 19, 2021 / 10:38 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:07 PM IST

नयी दिल्ली, 19 दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पटना उच्च न्यायालय द्वारा हत्या के मामले में एक आरोपी को जमानत देने के आदेश को खारिज करते हुए कहा है कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता एक अनमोल अधिकार है लेकिन अदालतें जमानत याचिका पर विचार करते समय आरोपों की गंभीर प्रकृति की अनदेखी नहीं कर सकती हैं।

न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की पीठ ने यह टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने पटना जिले की एक पंचायत के मुखिया पप्पू सिंह को जमानत देने के उच्च न्यायालय के फैसले की आलोचना की। पीठ ने वकील समरहर सिंह की दलीलों का संज्ञान लिया कि आरोपी ने 2020 में रूपेश कुमार की हत्या करने से पहले 2017 में भी उन्हें मारने का प्रयास किया था और सात महीने से फरार था। पीठ ने कहा कि अदालतों को इस तरह की याचिकाओं का निपटारा करने के दौरान स्वतंत्रता के अधिकार और मामले की गंभीरता के बीच संतुलन बनाना होगा।

पीठ ने कहा कि जमानत याचिका पर विचार करते समय प्रथम दृष्टया निष्कर्ष कारणों से समर्थित होना चाहिए और रिकॉर्ड पर लाए गए मामले के महत्वपूर्ण तथ्यों को ध्यान में रखते हुए किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाना चाहिए।

पीठ ने फैसले में कहा है, ‘‘हम इस तथ्य से अवगत हैं कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता एक अनमोल अधिकार है। साथ ही अदालतों द्वारा जमानत की याचिकाओं पर विचार करते समय किसी आरोपी के खिलाफ आरोपों की गंभीर प्रकृति और तथ्यों से संबंधित तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।’’

मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए हुए पीठ ने कहा कि आरोपी कई आपराधिक मामलों में मुकदमे का सामना कर रहा है। पीठ ने वकील की दलीलों पर भी ध्यान दिया कि आरोपी ने उच्च न्यायालय के समक्ष अपने आपराधिक अतीत को छुपाया था।

पुलिस के अनुसार पप्पू सिंह ने सह आरोपी दीपक कुमार के साथ मिलकर 19 फरवरी 2020 की रात पटना जिले के नौबतपुर थाना क्षेत्र में रूपेश कुमार की उसके घर पर हत्या कर दी। घटना के समय रूपेश की मां भी घर में मौजूद थीं। पप्पू सिंह फरार था और उसे 30 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। वकील ने कहा कि आरोपी उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने से पहले नौ महीने तक न्यायिक हिरासत में था।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप