सीबीआई ने चिकित्सक पर पांच लाख रुपये लेकर नीट प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आरोप लगाया

सीबीआई ने चिकित्सक पर पांच लाख रुपये लेकर नीट प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आरोप लगाया

सीबीआई ने चिकित्सक पर पांच लाख रुपये लेकर नीट प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आरोप लगाया
Modified Date: July 16, 2026 / 08:20 pm IST
Published Date: July 16, 2026 8:20 pm IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बृहस्पतिवार को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) प्रश्नपत्र लीक मामले में गिरफ्तार लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ ने एक अभ्यर्थी के परिवार से पांच लाख रुपये लिए और परीक्षा से पहले अपने अस्पताल में उस अभ्यर्थी को लीक हुआ रसायन विज्ञान का प्रश्नपत्र दिखाया था।

सीबीआई ने यह जानकारी विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत में दी, जो बाल रोग विशेषज्ञ मनोज भगवानराव शिरुरे की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।

सीबीआई ने अदालत को बताया कि शिरुरे ने दो अन्य चिकित्सकों को सह-आरोपी पी. वी. कुलकर्णी से मिलवाया था और इन चिकित्सकों के बच्चों को भी कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक का फायदा मिला।

विशेष लोक अभियोजक नीतू सिंह ने अदालत को बताया कि आरोपी चिकित्सक ने सह-आरोपी शिवराज मोटेगांवकर के बेटे आदित्य मोटेगांवकर को मई तीन को हुई नीट-यूजी परीक्षा से पहले अप्रैल के तीसरे सप्ताह में अपने अस्पताल में लीक हुआ रयासन विज्ञान का प्रश्नपत्र दिखाया।

सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि अभ्यर्थी के परिवार से मिले पांच लाख रुपये शिरुरे की बहन के घर से बरामद किए गए। एजेंसी ने यह आरोप भी लगाया कि शिरुरे ने दो अन्य चिकित्सकों को कुलकर्णी के पास भेजा था और इन चिकित्सकों के बच्चों ने तीन-तीन लाख रुपये देकर लीक हुआ रसायन विज्ञान का प्रश्नपत्र प्राप्त किया।

सीबीआई ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जांच फिलहाल महत्वपूर्ण चरण में है और डिजिटल सबूतों, वित्तीय लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड तथा पूरे षड्यंत्र की जांच की जा रही ह,। ऐसे में आरोपी को रिहा करने से जांच और मुकदमे पर असर पड़ सकता है।

सीबीआई ने कहा, “सिर्फ यह तथ्य कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, जमानत देने का आधार नहीं हो सकता। यदि अपराध गंभीर हो, समाज के लिए नुकसानदायक हो और प्रथम दृष्टया आरोपी की जानबूझकर भागीदारी के सबूत हों, तो पहली बार आरोपी होने पर भी जमानत नहीं दी जा सकती।”

एजेंसी ने कहा कि शिरुरे चिकित्सक होने के साथ-साथ अस्पताल का मालिक और लातूर के शैक्षणिक संस्थानों में पदाधिकारी भी है, इसलिए वह मामले से जुड़े गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

सीबीआई ने स्वास्थ्य के आधार पर जमानत देने की मांग का भी विरोध किया। एजेंसी कहा कि आरोपी का उच्च रक्तचाप और मधुमेह नियंत्रित किया जा सकता है और ऐसा कोई कारण नहीं है जिससे यह साबित हो कि हिरासत में उसका उचित इलाज नहीं हो सकता।

एजेंसी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के फैसलों का भी हवाला दिया, जिनमें कहा गया था कि परीक्षा में धोखाधड़ी योग्यता आधारित व्यवस्था और जनता के भरोसे को कमजोर करती है, इसलिए ऐसे मामलों में जमानत पर फैसला करते समय सख्त रुख अपनाया जाना चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला 22 जुलाई के लिए सुरक्षित रख लिया।

भाषा जोहेब माधव

माधव


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