नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से कहा कि वह इस अकादमिक सत्र के लिए छठी कक्षा के छात्रों को अपनी त्रि-भाषा नीति से छूट देने पर विचार करे।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 17 सितंबर तक टालते हुए बोर्ड से कहा कि वह मौजूदा अकादमिक सत्र में छठी कक्षा के छात्रों को शामिल करने की संभावना पर विचार करे।
पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।
न्यायालय ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ‘‘इस साल छठी कक्षा पर विचार करें…यदि उन्हें कुछ छूट दी जा सकती है…।’’
मेहता ने अदालत से सुनवाई टालने का अनुरोध किया क्योंकि अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भाटी उपलब्ध नहीं थीं।
फिर भी, उन्होंने भरोसा दिलाया कि संबंधित अधिकारी पीठ के सुझाव पर विचार करेंगे।
शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा, ‘‘हम सब मिलकर बैठेंगे और फिर आपको सूचित करेंगे।’’
याचिकाकर्ताओं में से एक के वरिष्ठ वकील ने कहा कि मामले में और देरी नहीं होनी चाहिए क्योंकि छात्रों को आखिरकार परीक्षा देनी है और इससे उनके माता-पिता की चिंता बढ़ रही है।
न्यायालय उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था जिनमें सीबीएसई की उस नीति को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए एक जुलाई से तीन भाषाएं (जिनमें दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं) पढ़ना अनिवार्य किया गया था।
न्यायालय ने 20 अगस्त को सीबीएसई की उस नीति से पैदा होने वाली समस्याओं का समाधान तलाशने पर जोर दिया, जिसके तहत नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना जरूरी है। अदालत ने कहा कि बच्चों पर किसी भी तरह का दबाव नहीं पड़ना चाहिए।
भाषा सुभाष नरेश
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