पॉक्सो मामले में ग्रेनाइट कारोबारी वीरमणि और अन्य से जुड़े ठिकानों पर सीसीबी की छापेमारी
पॉक्सो मामले में ग्रेनाइट कारोबारी वीरमणि और अन्य से जुड़े ठिकानों पर सीसीबी की छापेमारी
चेन्नई, 24 सितंबर (भाषा) केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) ने नाबालिग के यौन शोषण के मामले में प्रमुख ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि और उसके सहयोगियों से जुड़े पांच ठिकानों पर तलाशी ली तथा इस दौरान मोबाइल फोन और डिजिटल दस्तावेज जब्त किए। पुलिस ने यहां बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
यह मामला शहर में स्थित एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के स्वयंसेवक द्वारा 2025 में दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है।
एक अज्ञात व्यक्ति ने एक ‘पेनड्राइव’ सौंपी थी, जिसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति द्वारा एक नाबालिग लड़की का यौन उत्पीड़न किए जाने का वीडियो था। यह घटना वीरमणि की सहयोगी शांति के आवास पर हुई थी।
केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) के अनैतिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले दस्ते द्वारा की गई जांच के बाद संदिग्ध की पहचान जेम ग्रेनाइट्स के प्रमुख वीरमणि के रूप में हुई।
पुलिस ने 29 अगस्त, 2026 को बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित प्रावधानों के तहत वीरमणि (84) और उसके सहयोगियों शांति तथा महेंद्र सिम्हन को गिरफ्तार किया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कई नाबालिग लड़कियों को उस घर में लाया गया था और वीरमणि ने कथित तौर पर उनका यौन शोषण किया।
इसके बाद तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
गिरफ्तारी के बाद जांचकर्ताओं ने पहचान की गई पीड़िताओं के बयान भी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किए।
इसके बाद 22 सितंबर, 2026 को एक अन्य संदिग्ध गणेशन को गिरफ्तार किया गया, जिसने वीरमणि की कंपनी में 23 वर्षों तक काम किया था। उस पर आपत्तिजनक वीडियो को अपने पास रखने और इसकी जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को नहीं देने का आरोप है। उसे गिरफ्तार कर पुझल केंद्रीय जेल भेज दिया गया।
पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान गणेशन के कबूलनामे के आधार पर सीसीबी की टीम ने 23 सितंबर को पांच ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें गोपालपुरम स्थित वीरमणि का कार्यालय और टी. नगर स्थित उसका आवास भी शामिल है।
पुलिस ने बताया कि छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए गए। जब्त सामग्री के आधार पर मामले की आगे जांच की जा रही है।
पुलिस ने यह भी बताया कि जांच अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या कुछ कारोबारी संस्थाओं और वीरमणि के बीच महत्वपूर्ण धनराशि का लेन-देन तथा जमीन का हस्तांतरण हुआ था, ताकि अहम सबूतों को छिपाया जा सके और जांच को भटकाया जा सके।
वीरमणि के खिलाफ कई नाबालिग लड़कियों के कथित यौन शोषण के मामले में गिरफ्तारी के बाद तमिलनाडु में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के इस मामले को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है।
भाषा गोला संतोष
संतोष

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