नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) नशा मुक्त भारत अभियान के तहत साझेदारी का विस्तार करते हुए सरकार ने बुधवार को चार आध्यात्मिक संगठनों के साथ समझौते किए, जिनका उद्देश्य मादक पदार्थों के खिलाफ जमीनी स्तर पर जागरूकता, रोकथाम, पुनर्वास और सामाजिक लामबंदी को मजबूत करना है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत की मौजूदगी में अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र, चिन्मय मिशन, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान और हरे कृष्ण मूवमेंट के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
विभाग की ओर से निदेशक (मादक पदार्थ निवारण) आस्तिक कुमार पांडे ने समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
संबंधित संगठनों की ओर से अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र के चंद्र सिंह, चिन्मय मिशन की प्रेमा विश्वनाथ, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की साध्वी शिताभा भारती और हरे कृष्ण मूवमेंट के फतेह चंद शर्मा ने प्रतिनिधित्व किया।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ये साझेदारियां नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के तहत विभाग के लगातार जारी प्रयासों का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य आध्यात्मिक और मूल्यों पर आधारित संगठनों की व्यापक पहुंच, प्रभाव और सामुदायिक नेटवर्क का लाभ उठाकर मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूकता, रोकथाम और सामाजिक लामबंदी को मजबूत करना है।
इस अवसर पर पंत ने कहा कि मंत्रालय से पहले से जुड़े संगठनों के सामूहिक प्रयासों से एनएमबीए की पहल अब तक 34.42 करोड़ से अधिक नागरिकों तक पहुंच चुकी है।
उन्होंने नए साझेदार बनाए गए संगठनों से अपनी पहुंच का अधिकतम विस्तार करने और मादक पदार्थों के खिलाफ संदेश फैलाने के लिए अपने व्यापक नेटवर्क का उपयोग करने का आह्वान किया।
नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में आध्यात्मिक संगठनों के महत्व को दोहराते हुए पंत ने कहा कि जमीनी स्तर पर उनकी व्यापक मौजूदगी व्यक्तियों और परिवारों में मुश्किल परिस्थितियों से उबरने की क्षमता विकसित करने, मादक पदार्थों के सेवन से जुड़े विकारों को लेकर सामाजिक कलंक कम करने तथा प्रभावित लोगों को समय पर मदद, उपचार और पुनर्वास लेने के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मंत्रालय इससे पहले आर्ट ऑफ लिविंग, ब्रह्माकुमारीज, संत निरंकारी मिशन, इस्कॉन, श्री राम चंद्र मिशन, अखिल विश्व गायत्री परिवार, शिवानंद योग वेदांत धनवंतरी आश्रम और पतंजलि विश्वविद्यालय के साथ भी समझौता ज्ञापन कर चुका है।
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