जानवरों की ‘कस्टडी’ संबंधी नियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र, अन्य से जवाब-तलब

Ads

जानवरों की ‘कस्टडी’ संबंधी नियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र, अन्य से जवाब-तलब

  •  
  • Publish Date - March 10, 2026 / 05:37 PM IST,
    Updated On - March 10, 2026 / 05:37 PM IST

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मुकदमा लंबित रहने के दौरान जानवरों की देखरेख का जिम्मा सौंपने (कस्टडी) संबंधी नियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार एवं अन्य से जवाब तलब किया।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने याचिका की सुनवाई करने पर सहमति जताई और इस पर केंद्र और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किये।

पीठ ने इस याचिका को इसी तरह के मुद्दे से संबंधित एक लंबित याचिका के साथ नत्थी कर दिया।

याचिका में ‘‘पशु क्रूरता निवारण (मुकदमे से संबंधित जानवरों की देखभाल और रखरखाव) नियम, 2017’’ के नियम-तीन को ‘पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960’, विशेषकर धारा 29 के विरुद्ध और ‘अधिकारातीत’ घोषित करने की मांग की गई है और परिणामस्वरूप इसे असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध किया गया है।

वर्ष 1960 के संबंधित अधिनियम की धारा-29 उस शक्ति से संबंधित है, जिसके तहत अदालत दोषी पाए गए व्यक्ति से जानवर का कब्जा ले लेने का अधिकार रखता है।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि नियम-तीन के तहत दोष साबित होने से पहले किसी पशु का मालिकाना हक जब्त करने, स्थानांतरित करने या स्थायी रूप से छीनने को असंवैधानिक घोषित किया जाए, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 300ए सहित अन्य प्रावधानों का उल्लंघन करता है।

संविधान का अनुच्छेद 14 जहां कानून के समक्ष समानता से संबंधित है, वहीं अनुच्छेद 300ए यह सुनिश्चित करता है कि किसी व्यक्ति को कानून द्वारा दी गई अनुमति के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

भाषा सुरेश नरेश

नरेश