नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार से उस नाबालिग बच्चे का पता लगाने और उसे उसके भारतीय पिता से वर्चुअल माध्यम से मिलाने के प्रयास करने को कहा, जिसे उसकी मां रूस ले गई है।
बच्चे की अभिरक्षा को लेकर रूसी महिला और उसके भारतीय पति के बीच अदालत में मुकदमा चल रहा है, इस बीच महिला बच्चे को अपने साथ लेकर मॉस्को चली गई।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि महिला और उसके बेटे के ठिकाने को गुप्त रखा जा सकता है और फिलहाल उन्हें भारत वापस लाने का कोई प्रयास न किया जाए।
पीठ ने कहा कि नाबालिग बच्चे को उसके पिता से आभासी रूप से मिलाने के लिए राजनयिक प्रयास जारी रखे जाने चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय ने रूस स्थित भारतीय दूतावास से भी अनुरोध किया कि वे (अधिकारी) सीमित उद्देश्य से महिला और बच्चे का पता लगाने के लिए वहां के अधिकारियों से इस मामले पर बात करें।
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि भारत और रूस के विदेश सचिवों की बैठक और इंटरपोल के ब्लू कॉर्नर नोटिस सहित कई प्रयासों के बावजूद बच्चे का पता लगाने में कोई खास प्रगति नहीं हुई है।
महिला वर्ष 2019 से भारत में रह रही थी और वह एक्स-1 वीजा पर भारत आई थी, जिसकी अवधि समाप्त हो चुकी थी।
हालांकि, अदालती कार्यवाही के दौरान उच्चतम न्यायालय ने समय-समय पर वीजा की अवधि बढ़ाने का निर्देश दिया।
पिछले साल 21 जुलाई को उच्चतम न्यायालय को अवगत कराया गया कि शायद रूसी महिला नाबालिग बेटे के साथ नेपाल सीमा के रास्ते देश छोड़कर चली गई है और संभवतः शारजाह के रास्ते अपने देश पहुंच गई है।
उच्चतम न्यायालय ने इस स्थिति को ‘अस्वीकार्य’ बताया और ‘अदालत की घोर अवमानना’ का मामला बताया।
बच्चे के पिता ने आरोप लगाया कि उनकी अलग रह रही पत्नी बच्चे की अभिरक्षा से जुड़े अदालती आदेश का पालन नहीं कर रही है।
उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसे महिला और अपने बेटे के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
उच्चतम न्यायालय ने 22 मई, 2025 को निर्देश दिया कि बच्चे की विशेष अभिरक्षा सप्ताह में तीन दिन (सोमवार, मंगलवार और बुधवार) के लिए मां को दी जाए और शेष दिनों के लिए बच्चा अपने पिता की विशेष अभिरक्षा में रहे।
भाषा संतोष सुरेश
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