जयपुर, एक मई (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवर को कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है बल्कि समाज को जोड़ने और समझने का जरिया है।
वह यहां विदेशी भाषा संचार कौशल पाठ्यक्रम से संबंधित सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर से जुड़े कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज को जोड़ने और समझने का माध्यम है। विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति—2020 महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें शिक्षा को बहुभाषी और अंतरराष्ट्रीय बनाने पर जोर दिया गया है।”
प्रधान ने कहा कि फ्रेंच, जर्मन, जापानी, कोरियाई और स्पेनिश जैसी भाषाएं सीखने से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
उन्होंने कहा, “जापान और कोरिया जैसे देशों में रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। हमारे युवा इन देशों की भाषाएं सीखें, तो वे न केवल सॉफ्टवेयर बल्कि ‘हार्ड ट्रेड’ और मार्केटिंग समेत विभिन्न क्षेत्रों में भी अवसर पा सकते हैं।”
केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शिक्षा नीति में मातृभाषाओं को प्राथमिक शिक्षा का आधार बनाया गया है। स्थानीय भाषा हमारे गौरवशाली अतीत संजोए रखने के साथ-साथ हमे विश्वास देती है, हमारी जड़ों से हमारा भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करती है।”
भाषा पृथ्वी जोहेब
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