बोस की ‘अस्थियां’ लाने की अर्जी पर केंद्र चार हफ्ते में जवाब दाखिल करे : न्यायालय
बोस की ‘अस्थियां’ लाने की अर्जी पर केंद्र चार हफ्ते में जवाब दाखिल करे : न्यायालय
नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी की उस याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया, जिसमें तोक्यो के रेंकोजी मंदिर से उनकी (बोस) “अस्थियां” वापस लाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
शीर्ष अदालत ने 11 अगस्त को बोस की बेटी अनीता बी फाफ की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सोमवार को न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ से अनुरोध किया कि सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया जाए।
फाफ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने एक हस्तक्षेपकर्ता की अर्जी का विरोध किया, जो मामले में दखल देने की कोशिश कर रहा था।
हस्तक्षेपकर्ता यह आरोप लगाते हुए फाफ की याचिका विरोध कर रहा था कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे साबित हो कि वह (फाफ) नेताजी की बेटी हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने सिंघवी की आपत्ति का संज्ञान लेते हुए कहा कि पीठ आवेदक को अपनी दलीलें रखने से नहीं रोक सकती।
इससे पहले, सिंघवी ने कहा था कि फाफ ने “लगातार और सार्वजनिक रूप से मांग की है कि उनके पिता के पार्थिव अवशेषों को सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार के लिए भारत वापस लाया जाए।”
अगस्त 1945 में बोस के गायब होने को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं। कुछ रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनके अवशेष तोक्यो के रेंकोजी मंदिर में सुरक्षित रखे गए हैं।
शीर्ष अदालत ने इस साल मार्च में बोस के पड़पोते की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था, जिसमें रेंकोजी मंदिर में रखी गई नेताजी की “अस्थियों” को भारत लाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
न्यायालय ने कहा था, “उनकी वारिस (बोस की बेटी) हमारे सामने नहीं हैं। अगर वह चाहती हैं कि अस्थियों को भारत लाया जाए, तो उन्हें पीठ के सामने आना होगा।”
उसने कहा था, “हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी भावनाओं को कानूनी कार्रवाई का रूप दिया जाए। लेकिन उन्हें आगे आना होगा।”
शीर्ष अदालत के याचिका पर सुनवाई करने से मना करने के बाद याचिकाकर्ता आशीष रे की ओर से पेश वकील ने उसे वापस लेने का अनुरोध किया था। न्यायालय ने रे को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी थी।
भाषा पारुल नरेश
नरेश

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