दक्षिणपंथी उपभोक्ता समूह, छात्रों के बीच झड़प के बाद सत्यजीत रे संस्थान में स्थिति सामान्य
दक्षिणपंथी उपभोक्ता समूह, छात्रों के बीच झड़प के बाद सत्यजीत रे संस्थान में स्थिति सामान्य
कोलकाता, 28 सितंबर (भाषा) कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एसआरएफटीआई) के मुख्य द्वार के बाहर सोमवार को पुलिस तैनात रही, जहां एक दिन पहले छात्रों के एक गुट और दक्षिणपंथी उपभोक्ता संरक्षण समूह अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (एबीजीपी) के सदस्यों के बीच हुई झड़प में कई लोग घायल हो गए थे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
इस बीच, पश्चिम बंगाल के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि एसआरएफटीआई में हुई हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और स्वामी विवेकानंद या भारत माता का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात करते हुए चट्टोपाध्याय ने कहा, ‘‘किसी भी शिक्षण संस्थान में हिंसा निंदनीय है। जैसा कि मैंने वीडियो में देखा, दोनों पक्षों के बीच झगड़े के दौरान स्वामी विवेकानंद या भारत माता की तस्वीर का अनादर किया गया तो हमें यह समझना होगा कि हम एक बहुत ही खराब स्थिति से गुज़र रहे हैं।’’
मंत्री ने कहा, ‘‘हम शिक्षण संस्थानों में इस संस्कृति को बदलेंगे। कोई भी बंगाली छात्र विवेकानंद की तस्वीर का अनादर नहीं कर सकता। इस तरह की संस्कृति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।’’
उन्होंने कहा कि पुलिस इस घटना की जांच कर रही है और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
संस्थान के मुख्य द्वार के बाहर मौजूद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस झड़प के सिलसिले में पास के पंचसयार पुलिस थाने में दोनों पक्षों की ओर से या खुद पुलिस द्वारा स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले दर्ज किए गए हैं।
सोमवार को कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। छात्र अपनी कक्षाओं में शामिल हुए और द्वार के सामने बाहरी लोगों की भीड़ भी नहीं एकत्र हुई। हालांकि, छात्रों ने परिसर में मौन प्रदर्शन किया।
संस्थान के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘आज स्थिति सामान्य है। बाहरी लोग चले गए हैं और छात्र फिर से कक्षाओं में शामिल हो रहे हैं।’’
रविवार को दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट का आरोप लगाया था।
छात्रों का आरोप है कि एबीजीपी के सदस्यों ने उन पर हमला किया, जबकि संगठन का दावा है कि उसके कार्यक्रम में बाधा डाली गई और उसके सदस्यों के साथ मारपीट की गई।
इस घटना के बाद परिसर में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए। छात्रों ने बाद में मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया तथा उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए धरना दिया, जिन पर उन्होंने हमला करने का आरोप लगाया था।
एबीजीपी के नेताओं के अनुसार, उन्होंने अधिकारियों से अनुमति लेने के बाद अपने कार्यक्रम के लिए संस्थान का सभागर किराये पर लिया था। कार्यक्रम सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ था।
समस्या उस समय शुरू हुई, जब छात्रों के एक समूह ने संस्थान के बाहर के लोगों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई और अधिकारियों से सवाल किया कि दक्षिणपंथी झुकाव वाले एक निजी संगठन को परिसर में कार्यक्रम करने की अनुमति क्यों दी गई।
आरोप है कि छात्रों ने विरोध जताने के लिए सभागार के पास पोस्टर लगाए, जिसके बाद उनके और कार्यक्रम का आयोजन करने वाले समूह के सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई।
छात्र संगठन ने एक बयान में आरोप लगाया कि कार्यक्रम में वक्ताओं ने ‘‘बहुत भड़काऊ भाषण’’ दिए और संगठन के सदस्यों ने छात्रों के लिए ‘‘राष्ट्र-विरोधी’’, ‘‘अर्बन नक्सल’’ और ‘‘आतंकवादी’’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कहासुनी के दौरान छात्राओं के साथ बदसलूकी की गई।
छात्रों ने आरोप लगाया कि बाद में एबीजीपी के कुछ सदस्यों ने चाकू से उन पर हमला किया, और दावा किया कि इस कथित हमले में चार छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि कई अन्य को भी चोटें आईं।
छात्र संगठन ने दावा किया कि झड़प के बाद परिसर के अंदर करीब 150 छात्र मौजूद थे और आरोप लगाया कि उन्हें ‘‘गुंडों ने घेर लिया था।’’
एक छात्र ने रविवार को एक समाचार चैनल को बताया, ‘‘हम सभागार में अपनी प्रैक्टिकल कक्षा में शामिल हो रहे थे। जब हमने देखा कि बाहर के कुछ लोग वहां एक कार्यक्रम कर रहे हैं, तो हममें से कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और दीवार पर पोस्टर लगा दिए। इसके बाद, उस संगठन के सदस्य हमारी तरफ आए और हमें पीटने लगे। हम किसी तरह वहां से बचकर छात्रावास की ओर भागने में कामयाब रहे।’’
संस्थान के एक शिक्षक ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने बीच-बचाव किया, तो उन पर और उनके कुछ साथियों पर हमला किया गया।
छात्र संगठन ने दावा किया कि छह पुलिसकर्मियों ने मुख्य आरोपी को पुलिस की गाड़ी में बिठा कर रखा था, जबकि परिसर के बाहर मौजूद भीड़ उसकी रिहाई की मांग कर रही थी।
हालांकि, एबीजीपी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और दावा किया कि छात्रों द्वारा कार्यक्रम में बाधा डालने तथा भारत माता और स्वामी विवेकानंद की तस्वीरों सहित पोस्टर व बैनर फाड़े जाने के बाद, उनके सदस्यों पर बिना किसी उकसावे के हमला किया गया।
एबीजीपी के एक सदस्य ने सभागार के लिए 15,000 रुपये किराया अदा करने का उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि झड़प में उसके कई सदस्य घायल हो गए और चार सदस्यों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
एबीजीपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज रॉय ने इस कार्यक्रम को ‘‘राष्ट्रवादी दृष्टिकोण’’ के साथ उपभोक्ता अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाने वाला आयोजन बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ छात्रों ने कार्यक्रम स्थल पर भारत माता की तस्वीर पर आपत्ति जताई और कार्यक्रम में शामिल लोगों, जिनमें महिलाएं भी थीं, को परेशान किया।
संस्थान के छात्रों के साथ एकजुटता दिखाते हुए, पुणे स्थित भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) के छात्र संघ ने आरोप लगाया कि ‘‘आरएसएस से संबद्ध एक समूह द्वारा आयोजित’’ कार्यक्रम के विरोध के दौरान उनके साथियों के साथ मारपीट की गई।
एफटीआईआई के छात्रों ने दावा किया कि कोलकाता स्थित संस्थान के छात्रों पर ईंट और अन्य चीजें फेंकी गईं तथा कुछ छात्रों पर चाकू और लाठियों से हमला किया गया।
एफटीआईआई के बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि पुस्तकालय के एक कर्मी के साथ मारपीट की गई।
इसने जनवरी 2024 में एफटीआईआई में हुई एक घटना का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि आरएसएस से जुड़े लोग परिसर में घुस गए थे और पठन-पाठन के दौरान छात्रों के साथ मारपीट की थी।
इस बीच, कलकत्ता यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ने हिंसा की निंदा की। इसके महासचिव सागरमय घोष ने कहा, ‘‘यह सोचे बिना कि गलती किसकी थी, जो कुछ भी हुआ वह पूरी तरह से गलत था। शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है।’’
भाषा सुभाष नरेश अविनाश
अविनाश

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