CGHS New Mediclaim Rule: क्या आप सरकारी कर्मचारी हैं? जान लें CGHS का यह नया नियम और आश्रितों की नई लिस्ट, वरना अटक सकते हैं आपके मेडिकल बिल

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CGHS New Mediclaim Rule: सरकारी कर्मचारियों के लिए CGHS के नियमों में हुआ बड़ा बदलाव, जिसने सरकारी कर्मचारियों को दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है.. जान लें नए नियम

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  • Publish Date - May 19, 2026 / 11:39 AM IST,
    Updated On - May 19, 2026 / 11:45 AM IST

CGHS New Mediclaim Rule/Image Credit: AI Generated

HIGHLIGHTS
  • CGHS नया नियम 2026: अब पुरुष कर्मचारियों को चुनना पड़ेगा सिर्फ एक परिवार पक्ष!

CGHS New Mediclaim Ruleसरकारी कर्मचारियों के लिए CGHS (Central Government Health Scheme) के नियमों में हुआ बड़ा बदलाव। CGHS ने स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारियों (Government Employee) को, मेडिकल सुविधा के लिए अब माता-पिता या सास-ससुर में से किसी एक को ही देना होगा CGHS कवर, यानी कि सीजीएचएस के अंतर्गत अब एक ही पक्ष को चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा सकती है।

CGHS Plans: चुना हुआ विकल्प होगा “पत्थर की लकीर”!

इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह चुनाव केवल एक ही बार किया जा सकता है और चुने हुए विकल्प को किसी भी परिस्थिति में, भविष्य में भी बदला नहीं जा सकता। CGHS के इस फैसले ने सरकारी कर्मचारियों को दोराहे पर खड़ा कर दिया है, क्योंकि उनके लिए अपनों के बीच चुनाव करना एक बड़ी मुसीबत बन गया है।

नियम के अनुसार, अगर एक बार माता-पिता को चुन लिया, तो उनके निधन के बाद भी आप सास-ससुर का नाम उसमें नहीं जोड़ सकेंगे। यानी अब फैसला बदला नहीं जा सकेगा, और यही बात सभी के लिए बड़ी समस्या बन गई है।

इस नियम की शुरुआत कब और क्यों हुई थी?

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी 13 मई 2026 के आधिकारिक आदेश में स्पष्ट किया गया कि उक्त नियम CGHS एवं CS (MA) रूल्स, 1944 के दायरे में आएंगे। सरकार ने ठीक ऐसा ही नियम जुलाई 2023 में भी निकाला था कि महिला और पुरुष दोनों श्रेणियों के कर्मचारियों को (माता-पिता या सास-ससुर) में से किसी एक ही परिवार को चुनना होगा।

New Mediclaim Rules for Government Employee: “आश्रित” (Dependents) की श्रेणी में कौन-कौन शामिल होंगे?

CGHS कार्ड में पति या पत्नी के अलावा भी कई ऐसे रिश्तेदार हैं जो नियमों के तहत आपके आश्रित माने जाएंगे। CGHS के तहत माता-पिता, सास-ससुर, विधवा बहन या पुत्री, नाबालिग भाई-बहन एवं सौतेले बच्चों को आश्रित माना जाता है, बशर्ते वे कर्मचारी के साथ निवास करते हों और उनकी आय का कोई अन्य स्रोत न हो।

चिकित्सा लाभ हेतु पुत्र की पात्रता 25 वर्ष की आयु अथवा विवाह (जो भी पहले हो) तक सीमित है, जबकि पुत्री विवाह होने तक आश्रित मानी जाएगी। चिकित्सा लाभ हेतु कर्मचारी की ऐसी पुत्री, जो तलाक शुदा है या अलग रह रही है, अपने नाबालिग बच्चों सहित आश्रित मानी जाएगी।

प्रीमियम कैसे कटता है?

मेडिकल प्रीमियम के नाम पर, कर्मचारियों को मिलने वाली मेडिकल सुविधा के बदले में उनके वेतन से हर महीने एक निश्चित धनराशि काटी जाती है। आपकी सैलरी से होने वाली यह कटौती आपके 7वें वेतन आयोग के पे-लेवल पर आधारित होती है।

जिन कर्मचारियों का पे-लेवल (Pay-Level) 1 से 5 के बीच है, उनकी सैलरी से हर महीने ₹250 काटे जाते हैं। अगर आप पे-मैट्रिक्स लेवल 6 में आते हैं, तो आपको हर महीने ₹450 का योगदान देना होगा वहीं लेवल 7 से 11 वाले कर्मचारियों को हर महीने ₹650 और लेवल 12 या उससे ऊपर वालों को ₹1000 का भुगतान करना पड़ता है।

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CGHS के नए नियम के अनुसार कर्मचारी माता-पिता और सास-ससुर दोनों को आश्रित के रूप में CGHS कार्ड पर जोड़ सकता है?

नहीं। नए स्पष्टीकरण (13 मई 2026) के अनुसार कर्मचारी केवल एक पक्ष (या तो अपने माता-पिता या सास-ससुर) को ही आश्रित चुन सकता है। दोनों को एक साथ जोड़ना संभव नहीं है।

क्या यह विकल्प बाद में बदला जा सकता है?

नहीं। यह One-Time & Irreversible विकल्प है। एक बार चुनाव कर लेने के बाद माता-पिता के निधन या किसी भी परिस्थिति में भी इसे बदला नहीं जा सकता।

इस नियम का पुरुष कर्मचारियों पर ज्यादा असर क्यों पड़ रहा है?

क्योंकि ज्यादातर मामलों में पुरुष कर्मचारियों को अपने माता-पिता और पत्नी के माता-पिता (सास-ससुर) दोनों की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। नए नियम ने उन्हें मजबूर किया है कि दोनों में से किसी एक को चुनें।

पेंशनर (Retired) कर्मचारियों के लिए यह नया नियम लागू होता है या नहीं?

हाँ, यह नियम serving employees के साथ-साथ pensioners पर भी लागू होता है। जो pensioner पहले option नहीं चुन पाए हैं, उन्हें भी अब एक बार में एक ही पक्ष चुनना होगा।