(सौगत मुखोपाध्याय)
कोलकाता, सात मई (भाषा) वरिष्ठ भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या से पश्चिम बंगाल में सनसनी फैलने के साथ ही राज्य में राजनीतिक हिंसा एवं बेलगाम अपराध की भयावह संस्कृति भी उजागर हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार राजनीतिक हिंसा की जड़ें पश्चिम बंगाल की अशांत राजनीतिक विरासत, संस्थागत विफलताओं और लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक-आर्थिक पतन में निहित हैं।
अधिकारी के 41 वर्षीय निजी सहायक और भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी रथ की बुधवार रात अज्ञात लोगों ने गोली मार कर हत्या कर दी।
राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सिद्धनाथ गुप्ता ने कहा कि प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि यह पेशेवर अपराधियों द्वारा बड़ी कुशलता से की गई हत्या है।
वरिष्ठ पत्रकार आशीष घोष ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में घिनौना राजनीतिक खेल पहले से ही चला आ रहा है और कोई भी सरकार इसे बदलना नहीं चाहती।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘अहिंसक गांधीवाद का सहारा लेने से विपक्ष द्वारा करारी हार होगी। पार्टियां, चाहे वे किसी भी रंग की हों, अपने पूर्ववर्तियों के राजनीतिक डीएनए को बरकरार रखती हैं, जैसे आज भाजपा में ज्यादातर लोग दो दिन पहले तृणमूल कांग्रेस में थे। अपराधियों को नेताओं का संरक्षण प्राप्त है।’’
बंगाल में राजनीतिक हिंसा की जड़ों का जिक्र करते हुए घोष ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कुछ बंगाली क्रांतिकारियों की उग्रवादी प्रवृत्तियों, 1960 के दशक में पहली और दूसरी संयुक्त मोर्चा सरकारों के दौरान हुई झड़पों और नक्सलवादी आंदोलन के उदय की चर्चा की।
घोष ने कहा, ‘‘हथियार और बम तो मानो हमारे खून में हैं।’’ उन्होंने कहा कि बंगाल में राजनीतिक सक्रियता बहुत पहले ही हिंसा के दायरे में सिमट गई थी।
राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर मैदुल इस्लाम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपराधीकरण को पिछले कुछ दशकों में राज्य में औद्योगीकरण में गिरावट से जोड़ा। उन्होंने कहा कि उद्योगों से बेरोजगार हुए कुछ कर्मचारियों ने आपराधिक गतिविधियों का रास्ता अपनाया और साथ ही वे राज्य के संघर्षपूर्ण राजनीतिक माहौल में फंस गए।
उन्होंने कहा, पश्चिम और दक्षिण भारत के कई राज्य कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था से उद्योग प्रधान अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहे थे लेकिन पश्चिम बंगाल ने इसके विपरीत मार्ग अपनाया।
इस्लाम ने राज्य की राजनीति में हिंसा के प्रसार की व्याख्या करते हुए कहा, “राज्य में लगभग सभी आर्थिक गतिविधियों से राजनीति जुड़ी हुई है, जैसे संपत्ति खरीदना या सड़क निर्माण के ठेके प्राप्त करना…।’’
उन्होंने कहा कि जब पार्टी के प्रति वफादारी ही आय का एकमात्र मानदंड बन जाती है और जीविका का साधन बन जाती है, तो आपराधिक गतिविधियां जारी रहेंगी।
इस्लाम ने कहा, “जब तक बंगाल की राजनीतिक अर्थव्यवस्था में बदलाव नहीं आता और श्रम-प्रधान उद्योग संतुलित दृष्टिकोण के साथ स्थापित नहीं होते, तब तक बंगाल की राजनीति में हिंसा नहीं रुकेगी।”
एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार बिस्वजीत भट्टाचार्य ने कहा कि अन्य क्षेत्रों के विपरीत, जहां सामाजिक हिंसा जातिगत विभाजन जैसे कारकों से जुड़े समीकरणों से संबंधित होती है, बंगाल का राजनीतिक परिदृश्य विशुद्ध रूप से राजनीतिक है क्योंकि यहाँ ऐसे सामाजिक कारक मौजूद नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां भूमि पर कब्जा करने से लेकर सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक संरचनाओं के निर्माण तक की घटनाएं, भले ही विशुद्ध रूप से राजनीतिक नहीं हों, लेकिन किसी न किसी रूप में वे हमेशा राजनीतिक रंग ले लेती हैं।
भाषा अविनाश माधव
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