स्वास्थ्य केंद्रों में आग की घटनाओं से निपटने के लिए दिशानिर्देशों में बदलाव, मरीज सुरक्षा पर जोर

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स्वास्थ्य केंद्रों में आग की घटनाओं से निपटने के लिए दिशानिर्देशों में बदलाव, मरीज सुरक्षा पर जोर

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  • Publish Date - May 4, 2026 / 04:55 PM IST,
    Updated On - May 4, 2026 / 04:55 PM IST

नयी दिल्ली, चार मई (भाषा) बिजली सर्किट पर अधिक भार और ऑक्सीजन से भरपूर वातावरण के कारण अस्पताल आग लगने की घटनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, ऐसे में सरकार ने स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं, जो आपात स्थितियों के दौरान मरीजों की सुरक्षा और गंभीर रूप से बीमार एवं चलने-फिरने में असमर्थ रोगियों की जरूरतों के अनुरूप चरणबद्ध निकासी रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि ‘‘स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों में आग और जीवन सुरक्षा संबंधी राष्ट्रीय दिशानिर्देश (2026)’’ अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा तैयारियों में महत्वपूर्ण सुधार को दर्शाते हैं।

उसने कहा कि इन दिशानिर्देशों में आईसीयू (गहन देखभाल इकाई), एनआईसीयू (नवजात गहन देखभाल इकाई), पीआईसीयू (बाल चिकित्सा गहन देखभाल इकाई) और ऑपरेशन थिएटर में भर्ती मरीजों सहित उच्च जोखिम वाले समूहों के लिए विशेष प्रोटोकॉल के साथ निकासी योजना का विस्तार किया गया है।

संशोधित दिशानिर्देश 2020 में जारी दिशानिर्देशों का अद्यतन संस्करण हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड महानिदेशालय, भारतीय मानक ब्यूरो, योजना एवं वास्तुकला विद्यालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विशेषज्ञों से परामर्श के बाद इन्हें तैयार किया है।

अधिकारियों ने बताया कि बिजली सर्किट पर अधिक भार, ऑक्सीजन की अधिक सांद्रता वाले वातावरण और जटिल चिकित्सा उपकरणों की मौजूदगी के चलते अस्पताल आग लगने की घटनाओं के प्रति खासतौर पर संवेदनशील बने रहते हैं, जिसके मद्देनजर अधिक मजबूत और मानकीकृत सुरक्षा दृष्टिकोण की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि संशोधित दिशानिर्देशों में एक व्यापक जोखिम-आधारित रणनीति अपनाई गई है, जिसमें लक्षित हस्तक्षेपों के लिए गहन देखभाल इकाइयों, ऑपरेशन थिएटर, ऑक्सीजन भंडारण सुविधाओं और बिजली प्रतिष्ठानों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की गई है।

अधिकारियों के मुताबिक, इन दिशानिर्देशों में अग्नि पहचान एवं अलार्म प्रणाली, आग बुझाने के तंत्र, बिजली सुरक्षा और चिकित्सा गैस पाइपलाइन प्रणाली के लिए विस्तृत प्रावधान शामिल किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि संशोधित दिशानिर्देशों की प्रमुख विशेषता आपातकालीन स्थितियों के दौरान मरीजों की सुरक्षा पर विशेष जोर देना है। यह गंभीर रूप से बीमार और चलने-फिरने में रोगियों की जरूरतों के अनुरूप क्षैतिज और चरणबद्ध निकासी रणनीतियां सुझाता है, ताकि जीवन रक्षक प्रणालियों में न्यूनतम व्यवधान हो।

अधिकारियों के अनुसार, इन दिशानिर्देशों में एक मजबूत शासन और जवाबदेही ढांचा भी पेश किया गया है, जिसमें आग लगने की सूरत में समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल प्रशासन, अग्नि सुरक्षा समितियों और नामित सुरक्षा अधिकारियों की भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

उन्होंने बताया कि संस्थागत तैयारियों को मजबूत करने के लिए दिशानिर्देशों में स्वास्थ्य कर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम, इंडक्शन मॉड्यूल और मॉक ड्रिल अनिवार्य किए गए हैं। इसमें संस्थानों में अग्नि सुरक्षा की संस्कृति को सुदृढ़ करने के लिए आवधिक सुरक्षा ऑडिट और लगातार निगरानी का भी आह्वान किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले संस्करण के मुकाबले 2026 के दिशानिर्देशों में व्यापक तकनीकी प्रावधान किए गए हैं, जिसमें धुआं प्रबंधन, विद्युत प्रणालियों और चिकित्सा गैस सुरक्षा के लिए उन्नत उपाय शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि नये दिशानिर्देशों में आईसीयू और एनआईसीयू जैसे क्षेत्रों के लिए इकाई-विशिष्ट प्रोटोकॉल की रूपरेखा भी पेश की गई है।

अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रीय भवन संहिता (2016) के प्रावधानों के अनुरूप ये दिशानिर्देश आगामी राष्ट्रीय भवन निर्माण मानक (2026) और संबंधित राज्य विनियमों के साथ लागू किए जाएंगे।

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश