छत्तीसगढ़ शराब ‘घोटाला’: ईडी ने 1,000 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की, चार और आरोपी नामजद

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छत्तीसगढ़ शराब ‘घोटाला’: ईडी ने 1,000 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की, चार और आरोपी नामजद

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 10:25 PM IST,
    Updated On - June 1, 2026 / 10:25 PM IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को कहा कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच के तहत उसने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक बाजार मूल्य की संपत्तियों को कुर्क किया है।

ईडी ने यह भी कहा कि उसने चार और आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिससे धन शोधन मामले में आरोपियों की कुल संख्या 85 हो गई है।

केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि उसने 28 मई को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत तीन अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए, जिसमें लगभग 200 करोड़ रुपये के विलेख मूल्य और 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के बाजार मूल्य वाली संपत्तियों को कुर्क किया गया।

ईडी के अनुसार, उसकी जांच में पाया गया कि अनवर ढेबर और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा के नेतृत्व वाले एक शराब ‘सिंडिकेट’ ने वरिष्ठ अधिकारियों, शराब बनाने वाली इकाइयों के मालिकों और निजी संस्थाओं के साथ मिलीभगत कर 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ आबकारी शुल्क तंत्र में हेरफेर किया और अपराध से करीब 2,883 करोड़ रुपये अर्जित किए।

ईडी ने आरोप लगाया कि अवैध आय ‘‘शराब की खरीद दरों में कृत्रिम वृद्धि, अवैध शराब के गुप्त निर्माण और पसंदीदा संस्थाओं को दिए गए ‘एफएल-10ए’ लाइसेंस के माध्यम से कमीशन की वसूली’’ से अर्जित की गई थी।

पहला कुर्की आदेश विकास अग्रवाल और ढेबर से जुड़ी संपत्तियों से संबंधित है। ईडी ने आरोप लगाया कि अग्रवाल ‘सिंडिकेट’ के वित्तीय प्रबंधक के रूप में कार्य करता था, शराब बनाने वाली इकाइयों और ‘एफएल-10ए’ लाइसेंसधारियों से कमीशन एकत्र करता था और अनवर ढेबर को धनराशि भेजता था।

एजेंसी ने कहा कि अग्रवाल के परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियों को कथित तौर पर उनके द्वारा अपराध से प्राप्त आय के समतुल्य राशि के आधार पर कुर्क किया गया है।

इसने ढेबर की बेनामी संपत्तियों को भी जब्त किया, जिनमें रायपुर में कथित तौर पर उनके नियंत्रण वाली कंपनियों और फर्जी संस्थाओं के माध्यम से अर्जित भूखंड शामिल हैं। इस आदेश के तहत कुर्की की कुल राशि लगभग 30 करोड़ रुपये है।

एक दूसरे कुर्की आदेश में, ईडी ने उत्तरी गोवा स्थित पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व वाले ‘होटल वेस्टिन गोवा’ को कुर्क कर लिया।

ईडी ने कहा कि जांच में यह स्थापित हुआ कि होटल को अपराध से प्राप्त आय से लगभग 110 करोड़ रुपये में अधिग्रहित किया गया था।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि यह बेहिसाबी राशि शराब घोटाले से प्राप्त हुई थी और इसका भुगतान नकद रूप में किया गया। चैतन्य बघेल के इशारे पर यह नकद राशि स्थानांतरित की गई थी।

तीसरे कुर्की आदेश में तीन ‘एफएल-10ए’ लाइसेंस धारक कंपनियों के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड शामिल हैं। इन तीन कंपनियों में ओम साई बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, दिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

ईडी का आरोप है कि इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50-60 प्रतिशत सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर किया गया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 51 करोड़ रुपये का अंतरण हुआ।

एजेंसी ने रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में अपनी छठी पूरक अभियोग शिकायत भी दायर की है, जिसमें चार नए आरोपियों विजय भाटिया, टी भुवनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा और निखिल चंद्रकार को नामजद किया गया है।

ईडी ने भाटिया को ‘सिंडिकेट से घनिष्ठ संबंध रखने वाला’ व्यवसायी बताया है, जिसके पास कथित तौर पर ओम साई बेवरेजेज में 52.5 प्रतिशत बेनामी हिस्सेदारी थी। वहीं शर्मा पर सिंडिकेट की ओर से करोड़ों रुपये की नकदी को एक-जगह से दूसरे जगह पहुंचाने का आरोप है।

एजेंसी ने बताया कि नयी शिकायत दर्ज होने के साथ ही पीएमएलए के तहत अभियोजन में आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर 85 हो गई है।

भाषा संतोष अविनाश

अविनाश