समुद्री खतरों से निपटने के लिए नौसेना प्रमुख का क्षेत्रीय समन्वय का आह्वान

Ads

समुद्री खतरों से निपटने के लिए नौसेना प्रमुख का क्षेत्रीय समन्वय का आह्वान

  •  
  • Publish Date - February 21, 2026 / 10:01 PM IST,
    Updated On - February 21, 2026 / 10:01 PM IST

पणजी, 21 फरवरी (भाषा) नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने समुद्री लूट, अवैध प्रवासन और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे समुद्री खतरों से निपटने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) के देशों के बीच अधिक एकजुटता का शनिवार को आह्वान किया।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि समुद्र में सक्रिय आपराधिक नेटवर्क अब “अधिक संगठित, प्रौद्योगिकी की अच्छी समझ रखने वाले और आपस में जुड़े हुए” हो गए हैं। उन्होंने ठोस परिणाम हासिल करने के लिए संयुक्त और सहयोगात्मक अभियानों की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने गोवा के ‘नेवल वार कॉलेज’ में आयोजित गोवा समुद्री सम्मेलन (जीएमसी) के पांचवें संस्करण में समापन भाषण देते हुए कहा कि यह मंच संवाद-आधारित मंच से विकसित होकर कार्रवाई-उन्मुख ढांचे में तब्दील हो गया है।

द्विवार्षिक सम्मेलन का आयोजन ‘‘हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में सामान्य समुद्री सुरक्षा चुनौतियां – उभरते खतरों के प्रभाव को घटाना’’ विषय के तहत किया गया था।

इसमें कोमोरोस, केन्या, मालदीव और सेशेल्स सहित 14 प्रतिभागी देशों की नौसेनाओं और समुद्री एजेंसियों के प्रमुखों के साथ-साथ बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मेडागास्कर, मलेशिया, मॉरीशस, म्यांमा, सिंगापुर, श्रीलंका, तंजानिया और थाईलैंड के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।

नौसेना प्रमुख ने प्रमुख सुरक्षा चिंताओं पर प्रकाश डालते हुए अवैध, अघोषित और अनियंत्रित मछली पकड़ने को प्राथमिक समुद्री खतरों में से एक बताया।

उन्होंने कहा कि आईएफसी (अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा)-आईओआर की हालिया वार्षिक रिपोर्ट में पिछले दो वर्षों की तुलना में अघोषित और अनियंत्रित मछली पकड़ने की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है, जो बढ़ी हुई गश्त, बेहतर निगरानी और अधिक प्रभावी क्रियान्वयन के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।

नौसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘हालांकि, उच्च मूल्य वाली प्रजातियों को लगातार निशाना बनाए जाने और अवैध शिकार की घटनाओं के जारी रहने से कानूनी ढांचे, क्षेत्रीय सहयोग तंत्र, उन्नत निगरानी प्रौद्योगिकियों और समुदाय-आधारित हस्तक्षेपों को और मजबूत करने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।’’

उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन विशाखापत्तनम में हुए प्रमुख समुद्री आयोजनों के बाद आयोजित किया गया है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा (आईएफआर), द्विवार्षिक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास एमआईएलएएन और हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (आईओएनएस) के प्रमुखों का सम्मेलन शामिल हैं।

उन्होंने समुद्री लूट, सशस्त्र लूट और मानव तस्करी को बढ़ती चिंता का विषय बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘कई वर्षों तक अपेक्षाकृत नियंत्रण में रहने के बाद, समुद्री लूट ने नये सिरे से अनुकूलन क्षमता दिखाई है, जिसमें समुद्री डाकू समूह तट से 600 समुद्री मील दूर तक सक्रिय हैं, जबकि हालिया आरईसीएएपी आकलन एशियाई जलक्षेत्र में सशस्त्र लूट की घटनाओं में वृद्धि का संकेत देते हैं।’’

उन्होंने कहा कि मादक पदार्थ, हथियारों और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी में मात्रा और तकनीक दोनों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

त्रिपाठी ने कहा कि अवैध प्रवासन एक और भी चिंताजनक प्रवृत्ति प्रस्तुत करता है, जिसमें मृत्यु दर लगातार बढ़ रही है, क्योंकि प्रवासियों को असुरक्षित जहाजों में लंबी दूरी तक ले जाया जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘कुल मिलाकर, इन गतिविधियों से एक समान सूत्र निकलता है – समुद्री आपराधिक नेटवर्क अधिक संगठित, प्रौद्योगिकी की अच्छी समझ रखने वाले और आपस में जुड़े हुए हैं – जिसके लिए एक विश्वसनीय और समन्वित क्षेत्रीय प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।’’

जीएमसी के भविष्य के स्वरूप के बारे में बात करते हुए, नौसेना प्रमुख ने प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने, संयुक्त अभियान संचालित करने और सहयोग को संस्थागत रूप देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना का एनआईएसएचएआर (सूचना साझाकरण नेटवर्क) परिचालन संबंधी सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान का एक साधन हो सकता है, वहीं नौसेना जीएमसी सदस्यों के साथ विशेषज्ञता साझा करने, क्षमता निर्माण में सहयोग देने और निगरानी, ​​खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और परिचालन समन्वय को बढ़ाने वाले एक साझा डिजिटल ढांचे की खोज के लिए साझेदारी करने को तैयार है।

समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हमने दुनिया भर में देखा है कि सहयोगात्मक समुद्री अभियान किस प्रकार ठोस परिणाम देते हैं। जब राष्ट्र स्पष्ट रूप से परिभाषित उद्देश्यों के साथ मिलकर काम करते हैं, तो वे प्रतिरोध और आश्वासन दोनों उत्पन्न करते हैं।’’

उन्होंने अवैध, अघोषित और अनियंत्रित मछली पकड़ने के खिलाफ ऑपरेशन कुरु कुरु का उदाहरण दिया।

भारत की पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों के 44 कर्मियों के बहुराष्ट्रीय दल के साथ भारतीय नौसेना के एक जहाज, सागर की दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर में एक महीने की तैनाती ‘‘एक शुरुआत’’ थी।

उन्होंने कहा, ‘‘इस अनुभव के आधार पर और हमारे प्रधानमंत्री के महासागर (क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, हम इस वर्ष के अंत में आईओएस सागर 2.0 को व्यापक दायरे और व्यापक भागीदारी के साथ शुरू करेंगे। मैं आपके सुझावों का स्वागत करता हूं, ताकि यह पहल हमारी सामूहिक प्राथमिकताओं को प्रतिबिंबित कर सके।’’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उद्धृत करते हुए त्रिपाठी ने कहा, ‘‘विश्वास भारत की सबसे मजबूत पूंजी बन गया है।’’

द्विवार्षिक आयोजनों से परे सहयोग की वकालत करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘नियमित संवाद, सुनियोजित अनुवर्ती कार्रवाई और क्रमिक परिणामों की दिशा में काम करना हमारा कर्तव्य है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि यह मंच न केवल हमारी नौसेनाओं के लिए, बल्कि उन लोगों के लिए भी प्रासंगिक बना रहे जिनकी आजीविका सुरक्षित समुद्र पर निर्भर करती है।’’

इससे पहले, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नौसेना प्रमुख ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में प्रस्तावित कोई भी संयुक्त समुद्री तंत्र सहभागी देशों के बीच आम सहमति पर आधारित होगा, और उन्होंने क्षमता निर्माण प्रयासों में भागीदार देशों के लिए भारत के समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जीएमसी के पहले सत्र में संयुक्त कार्य बल जैसी व्यवस्था की संभावना सहित कई विषयों पर चर्चा हुई।

इससे पहले संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में प्रस्तावित कोई भी संयुक्त समुद्री तंत्र भागीदार देशों के बीच आम सहमति पर आधारित होगा।

भाषा अमित दिलीप

दिलीप