सीआईसी ने सीबीएसई को नियामानुसार शुल्क वसूलने और परिपत्र में संशोधन करने को कहा
सीआईसी ने सीबीएसई को नियामानुसार शुल्क वसूलने और परिपत्र में संशोधन करने को कहा
नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को निर्देश दिया है कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां उपलब्ध कराते समय छाया प्रति का शुल्क केवल आरटीआई नियम, 2012 में निर्धारित दर के अनुसार लिया जाए।
आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड 19 मई, 2025 के अपने परिपत्र में संशोधन करे।
आयोग ने यह पाया कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उत्तर पुस्तिकाएं प्राप्त करने के बाद उम्मीदवारों को पुनर्मूल्यांकन की मांग करने से रोकने वाला प्रावधान, पारदर्शिता संबंधी कानून की मूल भावना के अनुरूप नहीं है।
यह मामला सीबीएसई की कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा के एक परीक्षार्थी द्वारा दायर आरटीआई आवेदन से सामने आया। परीक्षार्थी ने आरटीआई अधिनियम के तहत अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की छाया प्रति मांगी थी और उसने नियमित पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया की अधिक लागत का हवाला दिया था।
उसने दसवीं कक्षा से संबंधित गणित (स्टैंडर्ड) के सेट-तीन के प्रश्नपत्र की कठिनाई के स्तर, मॉडरेशन नीति के क्रियान्वयन और अंकों में की गई कटौती को लेकर भी चिंता जताई थी।
आवेदन के अनुसार, पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में पांच विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं की छाया प्रति के लिए 2,500 रुपये, अंकों के पुनः सत्यापन के लिए 2,500 रुपये और प्रत्येक प्रश्न के लिए 100 रुपये शुल्क लिया जाता था। इस तरह कुल खर्च 10,000 रुपये तक पहुंच सकता था।
परीक्षार्थी ने अपने आरटीआई आवेदन में कहा था, ‘‘मैं अनुरोध करता हूं कि सीबीएसई अधिक राशि की पृष्ठभूमि मुझे आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत मेरी उत्तर पुस्तिकाओं की छाया प्रति उपलब्ध कराए।’’
बोर्ड के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने दो जुलाई, 2025 को परीक्षार्थी को सूचित किया कि आवश्यक शुल्क प्राप्त होने के बाद मांगी गई उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां उसे ईमेल के जरिये भेज दी गई थीं।
इसके बाद परीक्षार्थी ने प्रथम अपील दायर की। इसमें उसने उत्तर पुस्तिकाओं में खाली पन्नों, गणित में मॉडरेशन नीति और अपनी उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन से जुड़े सवाल उठाए। प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने कहा कि ये मुद्दे मूल आरटीआई में शामिल सवालों से अलग थे और इनके लिए स्पष्टीकरण तथा विश्लेषणात्मक जवाब की आवश्यकता थी।
सीआईसी की सुनवाई के दौरान सीपीआईओ ने बताया कि आरटीआई नियम, 2012 में निर्धारित दर के तहत छाया प्रति के शुल्क का भुगतान किए जाने के बाद उत्तर पुस्तिका उपलब्ध करा दी गई थी।
सीपीआईओ ने 19 मई, 2025 को जारी सीबीएसई के एक परिपत्र का भी हवाला दिया। इसमें कहा गया था कि आरटीआई अधिनियम के तहत उत्तर पुस्तिका की प्रतियां प्राप्त की जा सकती हैं, लेकिन इस अधिनियम के तहत अंकों के सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन के लिए अनुरोध नहीं किया जा सकता।
सीआईसी ने इस प्रतिबंध पर आपत्ति जताई। आयोग ने कहा कि केवल इस वजह से कि किसी परीक्षार्थी ने आरटीआई के जरिये अपनी उत्तर पुस्तिका प्राप्त की है, उसे पुनर्मूल्यांकन की मांग करने से रोकना आरटीआई अधिनियम और नियमों की भावना के विपरीत है।
आयोग ने सीपीआईओ को भविष्य में पूरी सावधानी बरतने की भी चेतावनी दी और सिफारिश की कि सीबीएसई अपने 19 मई 2025 के परिपत्र में संशोधन करके उसे आरटीआई अधिनियम के अनुरूप बनाए।
भाषा संतोष सुरेश
सुरेश

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