जैमिनी रॉय से एम.एफ. हुसैन तक: प्रदर्शनी में भारतीय कला में आधुनिकता के विविध रूपों की झलक दिखी

जैमिनी रॉय से एम.एफ. हुसैन तक: प्रदर्शनी में भारतीय कला में आधुनिकता के विविध रूपों की झलक दिखी

जैमिनी रॉय से एम.एफ. हुसैन तक: प्रदर्शनी में भारतीय कला में आधुनिकता के विविध रूपों की झलक दिखी
Modified Date: September 6, 2026 / 07:18 pm IST
Published Date: September 6, 2026 7:18 pm IST

नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) भारतीय आधुनिकतावाद के कुछ सबसे प्रभावशाली कलाकारों (₨जिनमें जैमिनी रॉय, अमृता शेरगिल, एम.एफ. हुसैन, एफ.एन. सूजा और राम कुमार शामिल हैं) की कृतियां एक नयी प्रदर्शनी में एक साथ लाई गई हैं। यह प्रदर्शनी इस बात की पड़ताल करती है कि गहरे सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव से गुजर रहे समाज को कलाकारों ने किस तरह देखा, किस तरह उसकी कल्पना की और उस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

‘मेनी मॉडर्निज्म्स: फिगरिंग द न्यू आर्टिस्टिक इंडिया’ नाम की यह प्रदर्शनी फिलहाल थापर गैलरी में चल रही है। इसमें अलग-अलग पीढ़ियों और भौगोलिक क्षेत्रों से जुड़ी विविध कलात्मक शैलियों और प्रयोगों को शामिल किया गया है।

प्रदर्शनी में के.के. हेब्बार, भूपेन खाखर, सदानंद बाकरे, ए. रामचंद्रन, बद्री नारायण, सतीश गुजराल, सोहन कादरी, बी. प्रभा, हकू शाह और हिम्मत शाह समेत कई कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित की गई हैं।

यह प्रदर्शनी भारतीय आधुनिकतावाद को किसी एक शैली या आंदोलन के रूप में नहीं, बल्कि अलग-अलग इतिहासों, अनुभवों और देखने के नजरियों से आकार लेने वाले विविध और निरंतर विकसित होते कला-क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत करती है।

गांव और महानगर, परंपरा और अंतरराष्ट्रीय आधुनिकतावाद के बीच आवाजाही करते हुए यह प्रदर्शनी उन अनेक तरीकों की पड़ताल करती है, जिनके जरिये कलाकारों ने बदलते भारत पर प्रतिक्रिया दी और उसकी कल्पना की।

थापर गैलरी के निदेशक आशीष थापर ने एक बयान में कहा, ‘‘आधुनिक भारतीय कला किसी एक शैली के रूप में, किसी एक समय-बिंदु पर या किसी एक खास स्थान से नहीं उभरी। इसके केंद्र में एक बदलते समाज और इस बदलाव को देखने, अनुभव करने, याद रखने और इसकी कल्पना करने के तरीकों के प्रति प्रतिक्रिया थी।”

भाषा संतोष प्रशांत

प्रशांत


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